हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने में देरी करने पर मंगलवार रात तत्कालीन थानाध्यक्ष हरपाल सिंह एवं उपनिरीक्षक हल्का इंचार्ज सत्यनारायण शुक्ला के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। मुकदमा एससी एसटी एक्ट में आईजी के निर्देश पर दर्ज हुई है।
थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा का कहना है कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष हरपाल सिंह एवं एसआई सत्यनारायण शुक्ला वर्तमान में कहां तैनात हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में रामजीवन का आरोप था कि 19 अगस्त 2013 वह अपने पिता बेटालाल के साथ भैंस खरीदने जा रहा था। उसके पिता 35 हजार रुपये लिए थे। गांव के ही चार लोगों ने असेनी के आगे बाग के पास उन्हें घेर लिया। चारों बदमाशों ने पिता के गले में अंगोछा डालकर घसीटा। रामजीवन ने विरोध किया तो उसे पीटा।
इसके बाद राजीवन भाग कर गांव पहुंचा और गांव के कुछ लोगों के साथ दोबारा मौके पर आया। यहां पर उसके पिता बेहोश थे। सीएचसी दिबियापुर ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रामजीवन के तत्कालीन थानाध्यक्ष हरपाल सिंह को हत्या की तहरीर दी थी। जांच हल्का इंचार्ज सत्यनारायण शुक्ला कर रहे थे। आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष हरपाल सिंह एवं हल्का इंचार्ज जांच करने के नाम पर उसे टरकाते रहे। दो माह बाद यहां तैनात किए गए एसओ भोजराज सिंह ने रिपोर्ट दर्ज की।
चार में से तीन आरोपी हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आ चुके हैं, जबकि एक अभी भी जेल में है। रिपोर्ट दर्ज होने में देरी पर पीड़ित ने एससीएसटी आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग की सिफारिश पर आईजी जोन ने जांच कराई। इसमें हरपाल सिंह एवं सत्यनारायण शुक्ला दोषी पाए गए। आईजी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। थानाध्यक्ष अखिलेश मिश्रा का कहना है कि एससी एसटी एक्ट में रिपोर्ट दर्ज की गई है।