शहर के तिलक नगर स्थित एक मकान में एक कंपनी ग्लेज इंटरप्राईजेज चल रही थी जिसमें रोजगार की ट्रेनिंग देनें के नाम पर युवाओं को बंधक बनाया गया था। एक युवक जब भागकर कोतवाली पहुंचा तो कोतवाली में बैठे एसडीएम मौके पर पहुंचे और वहां पर युवाओं को बाहर निकलवाया। कंपनी के कागजों की जांच पड़ताल की तो कुछ नही मिला। इस पर एसडीएम ने मामले को पुलिस को सपुर्द कर दिया।
शुक्रवार की सुबह एसडीएम कोतवाली में बैठे थे। उसी समय एक युवक कोतवाली आया और बताया कि उसे ट्रेनिंग के नाम पर बुलाया गया और मोबाइल आदि सब रखकर बंधक बना लिया। जिस पर एसडीएम अमित राठौर व कोेतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। जिस मकान में कंपनी चल रही थी वहां पर दो सौ युवक अंदर से निकलें। जिससे वहां हड़कंप मच गया। एसडीएम ने सभी से बातचीत की तो सभी युवक राजस्थान, सूरत व अन्य जगहों के निकलें। युवकों ने बताया कि उन्हे रोजगार के लिए बुलाया गया और 18 हजार रुपये जमा करा लिए गए। इसके बाद तीन महीनें की ट्रेनिंग देने की बात कही। इस दौरान उनके मोबाइल आदि जमा करा लिए और कहीं नही निकलने दिया जा रहा। जब मकान की जांच की तो एक कमरे में घरेलू उत्पादों का ढेर लगा था। जिसका सैम्पल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। वही गोरखपुर के गजपुर गांव निवासी मनीष सिंह पुत्र कन्हैया लाल ने कोतवाली पुलिस को तहरीर भी दी। उधर एसडीएम अमित राठौर ने कंपनी के कागजों की जांच की तो कुछ सही नही मिला। जिस पर एसडीएम ने कोतवाली पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। देर शाम तक कोतवाली में मामले की जांच होती रही।
घर वालों से भी नही करने दी जाती थी बात
युवकों ने एसडीएम को बताया कि कंपनी में अंदर आने के बाद किसी से भी बात करने की इजाजत नही थी। यहां तक की घर वालों से भी बात नही करने देते थे। ज्यादा कहने पर घर वालों से इस शर्त पर बात करने देते थे कि वह कंपनी के बारे में कुछ नही बताएगा।
20 हजार रुपयों किस्तों में जमा कराए जाते थे
कंपनी में काम करने के लिए युवकों से किस्तों में 20 हजार रुपए वसूले जाते थे, सबसे पहले युवक को 10 हजार 550 रुपए देने होते थे। पूरी रकम उसे तीन से चार किस्तों में पूरे 20 हजार जमा करने होते थे। इसके बाद उन युवकों पर अन्य लोगों के लाने का प्रेसर बनाया जाता था।
एचडब्लूसी तरीके से काम करवाती थी कम्पनी
जो युवक उनके चंगुल में फ ंस जाता था। इसके बाद उन्हे ट्रेनिंग में बताया जाता कि एचड्ब्लूसी तरीके से काम करना है। पीडित की माने तो एच का मतलब युवक के सबसे करीब लोगों के नम्बर डब्लू का मतलब उससे कम करीबी का फ ोन नम्बर, सी का मतलब सबसे कम करीबी का फ ोन नंबर। इन फ ोन नंबरों पर कंपनी युवक से फ ोन करवा कर कंपनी की तरीफ करवाकर उसे भी चंगुल में लाने का प्रयास किया जाता था।
कोई व्याज पर तो कोई उधार लेकर आए थे रुपए
कंपनी में आने के लिए कोई उधार लेकर आया तो कोई ब्याज पर रुपए लेकर आया था। युवकों ने बताया कि रोजगार की आस में वह लोग आए थे।