अमर उजाला ब्यूरो
फफूंद (औरैया)। परचून दुकानदार सुरेंद्र पाल की पत्नी ने घटना को अंजाम देने से पहले ही पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। पति की हत्या से पहले शनिवार शाम सुरेंद्र की पत्नी मालती देवी ने थानाध्यक्ष के सीयूजी नंबर पर फोन कर सूचना दी थी कि उसका पति उसे और उसके बच्चों को जान से मारने के लिए कुल्हाड़ी लिए खड़ा है। थानाध्यक्ष ने दो एसआई हरिहर सिंह और रमाकांत मिश्रा को मौके पर भेजा था, घटना झूठी निकली।
मृतक के भाई राजेंद्र पाल ने थाने में रोते हुए बताया कि वह दो भाई हैं। हत्यारोपियों ने कुछ दिन पहले भी फेरी करके लौटते समय भाई पर ट्रैक्टर चढ़ाकर मारने की कोशिश की थी, लेकिन उस समय भाई बच गया था। इससे पहले भी फफूंद में हत्या करने की साजिश रची जा चुकी थी। हत्यारे कामयाब नहीं हो पाए थे। घटना के दिन दोपहर को भी भाई ने उससे अपनी हत्या का अंदेशा जताया था। राजेंद्र ने उसे हौसला रखने की बात कहते हुए तसल्ली बधाई थी। मृतक सुरेंद्र सिंह की दो संतानें हैं। इनमें एक पुत्र व एक पुत्री है। बेटी दीक्षा पाल 17 वर्ष की है और बेटा नितिन पाल 11 वर्ष का है। ग्रामीणों ने बताया कि सुरेंद्र अपने बच्चों से बेहद प्यार करता था।
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एक चश्मदीद जान बचाने को भागा
फफूंद। घटना के वक्त वहां से गुजर रहे एक गांव निवासी एक चश्मदीद ने बताया कि जब वह अपने घर जा रहा था तो घटनास्थल पर एक चार पहिया वाहन खड़ा था। कुछ लोग सुरेंद्र सिंह को मार रहे थे, जब वह वहां रुका तो वह लोग उसको भी मारने के लिए चिल्लाकर पकड़ने दौड़े। वह जान बचाने के लिए भाग निकला।
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घटनास्थल पर पड़ा मिला झोला और पेन
फफूंद। घटनास्थल पर मृतक का झोला और पेन भी पड़ा हुआ था। उसकी चप्पलें अलग-अलग दिशाओं में पड़ी थीं। ऐसा लग रहा था कि उसका हत्यारों से काफी संघर्ष भी हुआ था।
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मां का रो-रोकर बुरा हाल
फफूंद। बहू की करतूत को लेकर मां का रो-रोकर बुरा हाल रहा। गांव के लोग बहू को कोसते नजर आए, जिसने अपने स्वार्थ की खातिर अपनी ही मांग के सिंदूर का कत्ल करवा दिया। घटना की सूचना पर मां रोती-बिलखती हुई घटनास्थल पहुंची थी।