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एससी एसटी एक्ट के तीन आरोपियों को तीन-तीन वर्ष की कैद

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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) राजबहादुर सिंह मोर्या ने थाना बेला के ग्राम जौहर निवासी महिला समेत तीन लोगों को जातिसूचक गालियां देने से आहत करने के अपराध में तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 4500 रुपये अर्थदंड दिया है।


अभियोजन के अनुसार ग्राम जौहर निवासी एक युवक ने थाना बेला में रिपोर्ट लिखाई है कि नौ मार्च 2012 को उसके भाई पुत्री गांव के पास खेत में शौच के लिए गई थी। वहीं पर दीपू ने उससे छेड़छाड़ की। पीड़िता ने यह बात घर पर बताई तो ग्राम प्रधान के समझाने पर मामला शांत हो गया।
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लेकिन उसी रात आठ बजे दीपू, उसके पिता रज्जन व मां शकुंतला घर में घुस आए और गालीगलौज करते हुए जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया तथा लात-घूसों व लाठी-डंडों से मारपीट की, जिससे उसके गंभीर चोटें आईं। यह मुकदमा धारा 323, 452, 354, 504 व अनुसूचित जाति एक्ट का लिखा गया तथा एडीजे (फास्ट ट्रैक) कोर्ट में चला। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी लालजी दोहरे व बचाव पक्ष को सुनने के बाद अपर जिला जज राजबहादुर सिंह मोर्या ने अभियुक्त रज्जन, उसके पुत्र दीपू व पत्नी शकुंतला देवी को तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई व 4500 रुपये अर्थदंड लगाया। कोर्ट ने जुर्माने की संपूर्ण धनराशि से सात हजार वादी को बतौर प्रतिकर देने का आदेश दिया है। न्यायालय ने साक्षीगण तीन लोगों के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 1973 की धारा 344 के अंतर्गत न्यायालय के समक्ष मिथ्या साक्ष्य देने पर कार्रवाई किए जाने का आदेश दिया।

-मिथ्या साक्ष्य देने पर तीन पर भी हुई कार्रवाई
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