उरई। लूटी गई बाइक भले ही पुलिस न बरामद कर सकी हो लेकिन उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी को क्लेम देने का आदेश दिया है। कंपनी क्लेम देने में आना कानी कर रही थी, जिस पर वादी ने मामला फोरम में दाखिल किया था। वाद व्यय के रुपये में पांच हजार रुपये भी अदा करने का आदेश दिया।
उरई तहसील के अटरिया निवासी शमीम खां पुत्र मुन्ना के साथ 22 फरवरी 2010 की रात लूट हो गई थी। जिसकी रिपोर्ट चुर्खी थाने में दर्ज कराई गई। पहले तो शमीम बाइक की बरामदगी के लिए चौकी थाने के चक्कर काटते रहे लेकिन पुलिस का ढुलमुल रवैया देख शमीम ने बीमा कंपनी से संपर्क साधा। इस पर कंपनी ने यह कहकर बीमा पालिसी का लाभ देने से इंकार कर दिया कि तथाकथित लूट की घटना संदिग्ध है। पुलिस भी इस मामले में एफआर लगा चुकी है। लिहाजा बीमा राशि भुगतान नहीं की जा सकती है।
इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष जिष्णुकांत पांडेय व सदस्य रामबाबू निषाद ने पाया कि जानबूझकर बीमा कंपनी दावे का निस्तारण नहीं कर रही है। यह सेवा में कमी है। आज तक बीमा कंपनी इनवेस्टीगेटर की रिपोर्ट पत्रावली में दाखिले नहीं की है। बल्कि दावा कर रहा है कि इनवेस्टीगेटर नियुक्त ही नहीं किया गया है।
जबकि पत्रावली में इनवेस्टीगेटर नियुक्ति के साक्ष्य है। लिहाजा फोरम ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वादी को बीमा राशि के 57 हजार रुपये बाइक लूट की घटना 23 फरवरी 2010 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करें। साथ ही वाद व्यय के रुप में पांच हजार रुपये भी दिया जाए।