औरैया। जिला जजी में 19.22 लाख रुपये गबन के आरोपी पूर्व नाजिर शिवगणेश को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसकी पत्नी व रिश्तेदारों की तलाश की जा रही है। पूर्व नाजिर ने जिला जज के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर तीन चेकों से रुपया निकाल लिया था। बैंक ने उसे पैसे का भुगतान भी कर दिया है।
जिला जज में मोटर दुर्घटना से संबंधित वादों के निस्तारण के बाद संबंधित बीमा कंपनी की ओर से अदालत के खाते में पैसा जमा किया जाता है। वादों का निस्तारण होने के जिला जज के हस्ताक्षर से नाजिर संबंधित वादकारियों को चेक जारी करता है।
नाजिर शिवगणेश ने चेक लेने वाले वादकारियों का नाम देखा तो वे उसकी पत्नी व रिश्तेदारों के नाम से मेल खाते दिखेे। ऐसे में उसने वास्तविक वादकारियों को बुलाकर चेक देने के बजाय अपनी पत्नी और रिश्तेदारों को चेक जारी करने की रणनीति बना ली। फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
रजिस्टर पर जिला जज का फर्जी हस्ताक्षर भी बना दिया। नौ अगस्त 2017 को रिश्तेदार शैलेंद्र के नाम से 6.84 एवं 26 अगस्त 2017 को दूसरे रिश्तेदार शिवशंकर के नाम 7.67 लाख का चेक जारी कर दिया। ये दोनों चेकें बैंक से क्लीयर भी हो गईं।
एक मामले में वादकारी सुमन देवी का नाम दिखा। नाजिर की पत्नी का भी यही नाम है। इस पर उसने पांच सितंबर 2017 को सुमन देवी के नाम 5.67 लाख का चेक जारी कराया और इसे अपनी पत्नी के खाते में जमा करा दिया।
इसी बीच अक्टूबर 2017 में उसे नाजिर पद से हटा दिया गया। उसके स्थान पर चंद्रशेखर शुक्ला की तैनाती हुई। नए नाजिर ने रुपयों के हिसाब-किताब वाले रजिस्टर का मिलान किया तो उन्हें शक हुआ। इसी बीच एक मामले में भुगतान के संबंध में हाईकोर्ट से पत्र भी आ गया।
इस पत्र के आने के बाद मामले की पड़ताल की गई तो पता चला कि तीनों लंबित मामलों में चेकें जारी की जा चुकी हैं। इस पर बुधवार को नाजिर चंद्रशेखर ने कोतवाली में पूर्व नाजिर शिवगणेश, उसकी पत्नी सुमन देवी, रिश्तेदार शैलेंद्र एवं शिवशंकर व एक अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने देर रात शिवगणेश को गिरफ्तार कर लिया। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि आरोपी ने जिला जज के फर्जी हस्ताक्षर की बात स्वीकार कर ली है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
बीमा दावों के चेक में करता था धोखाधड़ी
मोटर दुर्घटना के मामले में आश्रित दावे के लिए कोर्ट में केस करता है। ऐसे में बीमा कंपनी जिला न्यायालय के खाते में ही दावे की राशि का भुगतान करती है। वहां से लाभार्थी वादी को दावे को भुगतान किया जाता है। आरोपी ने अपने रिश्तेदारों के नाम से फर्जी दावों की चेक बनाकर जिला न्यायाधीश के फर्जी हस्ताक्षर से 19 लाख रुपये का गड़बड़झाला किया।