उरई। पुलिस वालों को मानसिक तनाव से उबारने की कवायद शुरू हो गई है। एडीजी अविनाश चंद्र और आईजी आलोक सिंह के निर्देश के बाद हरकत में आए एसपी अरविंद चतुर्वेदी और एएसपी सुरेंद्र नाथ तिवारी बुधवार की रात सड़कों पर निकले। कुछ थाने, चौकी और पिकेट प्वाइंट पर रुककर दरोगा, दीवान और सिपाहियों से न सिर्फ मिले बल्कि बातचीत कर उनकी समस्याएं भी जानने का प्रयास किया। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पहले दिन काउंसलिंग में फिलहाल सब ठीक पाया गया लेकिन इसे निरंतर जारी रखा जाएगा। कर्मियों को तनावमुक्त रहने के लिए जरूरी बातें भी बताई गईं। फिर भी यदि कहीं कोई समस्या आएगी तो उसका समाधान कराया जाएगा।
बता दें कि हाल ही में मानसिक तनाव से ग्रस्त एएसपी, दरोगा और सिपाहियों के आत्महत्या के एक के बाद एक मामले सामने आने से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा है। दो दिन पहले ही एडीजी और आईजी जोन ने इस पर चिंता जताते हुए पुलिस कर्मियों की काउंसलिंग कराने का फैसला लिया था।
इस आदेश के जारी होते ही बुधवार की रात एसपी और अपर एसपी अपनी टीम के साथ सड़कों पर उतरे और उरई, एट व डकोर क्षेत्र के पिकेट प्वाइंट, रास्ते में पड़ने वाली चौकियों और थानों के दरोगा, दीवान व सिपाहियों से रुककर स्वयं मिले।
हालांकि अधिकारियों की यह कवायद पुलिस कर्मियों के लिए चौंकाने वाली रही, लेकिन जब उन्हें पता लगा कि यह सब उन्हीं के लिए किया जा रहा है, तो सभी ने सहजता से अफसरों की काउंसलिंग में उठे सवालों का जवाब दिया। अधिकारियों ने भी दीवान, दरोगा को बताया कि रात-दिन की पुलिस की नौकरी के बीच भी कैसे तनाव मुक्त रहा जा सकता है। घर की कोई चिंता हो तो साथियों से साझा करें और विभाग की कोई समस्या हो, उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा सकता है।
- काउंसलिंग में उठे कुछ ये सवाल
- जिले में कब से तैनाती है और घर कितनी दूर है।
- घर परिवार में कौन-कौन हैं, उनसे बात हो रही है कि नहीं।
- ड्यूटी कितने घंटे की है, रिपोर्टिंग स्टेशन से दूरी कितनी है।
- घर पर कोई जरूरी काम तो नहीं, जिसके लिए अवकाश जरूरी हो।
- वेतन और घर का बजट कितना है। स्वयं का खानपान कैसा है।
- किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्या तो नहीं है।
-थानेदार, सहकर्मी या फिर अधिकारी उत्पीड़न तो नहीं कर रहा है।
- काम को तनाव नहीं, आदत में शामिल करें
मनोवैज्ञानिक डॉ तारा शहजानंद का कहना है कि पुलिस कर्मियों को रात-दिन परिवार से दूर रहकर काम करना पड़ता है, फिर उनका खानपान भी ठीक नहीं रहता है। ऐसे में मानसिक तनाव होता है। जरूरी है कि पुलिस कर्मी अपने काम अथवा अधिकारियों के आदेश को तनाव के रुप में न लेकर उसे अपनी जिम्मेदारी समझें और इसे अपनी आदत में शामिल करें। इससे कम से कम आत्महत्या की भावना तो पैदा नहीं होगी। इसके अलावा नियमित समय पर भोजन और हो सके तो योग जरूर करें। इससे भी समस्या का काफी हद तक निदान हो सकेगा।
कर्मियों के लिए तैयार होगा काउंसलिंग सेल
अपर पुलिस अधीक्षक सुरेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि बिना अवकाश रात-दिन की ड्यूटी, उस पर परिजनों से दूरी कहीं न कहीं कर्मियों को तनाव तो देती ही है। इससे उन्हें उबारने के लिए एक काउंसलिंग सेल के गठन पर विचार किया जा रहा है। जिसके माध्यम से समय-समय पर पुलिस कर्मियों की काउंसलिंग की जाएगी, उनकी समस्याओं को न सिर्फ जाना बल्कि समझा भी जाएगा, ताकि उन्हें तनाव मुक्त किया जा सके। जिससे भविष्य में आत्महत्याओं की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
एडीजी, आईजी के निर्देश पर पुलिस कर्मियों को तनाव से उबारने की कवायद
अमर उजाला ब्यूरो