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तत्कालीन डीपीआरओ को कोर्ट से मिली राहत

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औरैया। जनवरी माह में प्रधान से रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए तत्कालीन डीपीआरओ को लखनऊ कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में जमानत पर रिहा कर दिया। 11 जनवरी को पट्टी तोरना के प्रधान रामविलास ने तत्कालीन प्रभारी डीपीआरओ कमल किशोर के शहर के नारायनपुर चौकी स्थित किराये के मकान पर शाम को पहुंचे थे। प्रधान ने ग्राम पंचायत में इंटर लाकिंग सड़क निर्माण की वित्तीय स्वीकृति के लिए 20 हजार रुपये देने का आरोप लगाया था। इसी दौरान एंटी करप्शन टीम ने रुपयों के साथ डीपीआरओ को गिरफ्तार कर लिया था। कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद लखनऊ स्थित एंटी करप्शन टीम जेल ले गई थी। डीपीआरओ के समर्थन में जिले की 477 ग्राम पंचायतों में 452 ग्राम पंचायतों के प्रधान तथा 500 सैकड़ा से अधिक सफाई कर्मचारियों ने डीपीआरओ को ऊपर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया था। लखनऊ कोर्ट में विचारण इस मुकदमे में एंटी करप्शन टीम तथा प्रधान द्वारा प्रथम दृष्टया कोई पुख्ता सबूत उपलब्ध न करा पाने के चलते डीपीआरओ को जमानत पर छोड़ने के आदेश जारी किए। डीपीआरओ के जल्द ही जिले में कार्यभार ग्रहण करने की संभावना जताई जा रही है। बुधवार को तत्कालीन डीपीआरओ कमल किशोर औरैया अपने नारायनपुर चौकी स्थित आवास पहुंचे। बताया कि यह जिले के प्रधानों और सफाई कर्मचारियों की जीत है। उन्होंने प्रधानों व कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया।
गिरफ्तार डीपीआरओ को कोर्ट से मिली राहत
एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते किया था गिरफ्तार
लखनऊ कोर्ट ने प्रथमदृष्टया दोष सिद्ध न होने पर जमानत पर किया रिहा
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