औरैया। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम मनराज सिंह ने सात साल पुराने शहर के एक कॉलेज में पढ़ने गई नाबालिग छात्रा को बहला-फुसलाकर ले जाने व दुष्कर्म करने के दोषी को 10 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषी को 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा भी सुनाई। सुनवाई के दौरान पीड़िता की ओर से दोषी के पक्ष में बयान देने के बावजूद भी कोर्ट ने उसे दंडित किया।
अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे डीजीसी अभिषेक मिश्रा, विशेष लोक अभियोजक जितेंद्र सिंह तोमर व मृदुल मिश्रा ने बताया कि मामला शहर का है। वादी ने कोतवाली में रिपोर्ट लिखाई कि नाबालिग पुत्री इंटरमीडिएट की छात्रा है। 14 जुलाई 2015 को वह सुबह लगभग साढ़े सात बजे पढ़ने के लिए कालेज गई थी पर वापस नहीं लौटी। इस पर परिजनों ने रिश्तेदारों के अलावा परिचितों में तलाश कराई पर पता नहीं चला। खोजबीन के दौरान उन्हें पता चला कि शहर निवासी रामप्रकाश के घर पर रह रहे उसके साले सर्वेंद्र उर्फ छोटू निवासी तमरापुर थाना सट्टी, कानपुर देहात पीड़िता का अपहरण करके ले गया है। पुलिस ने अन्य आरोपियों को निर्दोष बताते हुए केवल सर्वेंद्र उर्फ छोटू के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। यह मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम मनराज सिंह की कोर्ट में चला। अभियोजन की ओर से जितेंद्र सिंह तोमर व मृदुल मिश्रा ने नाबालिग छात्रा के साथ किए गए इस अपराध पर कठोर दंड देने की बहस की। वहीं बचाव पक्ष ने पीड़िता द्वारा आरोपी को निर्दोष बताने वाली गवाही का हवाला देते हुए सर्वेंद्र को निर्दोष मानने की बहस की। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे मनराज सिंह ने सर्वेंद्र उर्फ छोटू को नाबालिग को ले जाने व दुष्कर्म करने का दोषी मानते हुए सजा सुनाई। सजा पाए सर्वेंद्र को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया है।