औरैया। स्वयं को परिवहन मंत्री का पीआरओ बताकर साथियों के साथ वादी व उसके भाई की नौकरी लगवाने के नाम पर 10 लाख रुपये की ठगी करने वाले आरोपी की जमानत याचिका सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा ने खारिज कर दी है।
इटावा जिला कारागार में 21 अप्रैल से निरुद्ध पवन कुमार पर आरोप है कि उसने अपने साथी सह अभियुक्त नीतू सिंह यादव व अयाज खां के साथ मिलकर वादी सुधीर कुमार व उसके भाई देवेंद्र कुमार को परिवहन विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर विभिन्न खातों में व नकदी कुल मिलाकर 10 लाख रुपये हड़प लिए। वादी के पिता ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए जेवर व खेत को गिरवी रखकर किसी तरह से पैसों का इंतजाम किया। यही नहीं आरोपी ने कूट रचित नियुक्ति पत्र का लिफाफा वादी के व्हाट्सअप पर भेज कर गुमराह किया।
सच्चाई का पता लगने पर जब वादी ने अपने रुपये वापस मांगे तो उन्हें दबंगई के साथ बंधक बना लिया गया। शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी। अजीतमल कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत होने पर पवन कुमार, उसके साथी नीतू सिंह यादव व अयाज खां को गिरफ्तार किया गया। जेल में निरुद्ध पवन कुमार ने जमानत के लिए याचिका सत्र न्यायालय में प्रस्तुत की। डीजीसी अभिषेक मिश्रा ने परिवहन मंत्री का पीआरओ बताकर ठगी करने व फर्जी नियुक्ति पत्र बनाने और बंधक बनाकर धमकी देने के आरोपी पवन कुमार की जमानत याचिका का विरोध किया। जबकि बचाव पक्ष के वकील ने उसे निर्दोष बताया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार वर्मा ने जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि उक्त अपराध गंभीर प्रकृति का किया गया है। इसलिए प्रार्थी की जमानत याचिका स्वीकार करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।