औरैया। कम बारिश से परेशान किसानों के लिए राहत भरी खबर है। उद्यान विभाग ने किसानों को 500 क्विंटल आलू का बीज देने की तैयारी की है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक बेहतर पैदावार की सलाह दे रहे हैं। उद्यान विभाग के मुताबिक, कुफूरी-सिंदूरी, कुफूरी बहार (3797), चिप्सोना प्रजाति के आलू किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में मददगार होगी।
जिला उद्यान अधिकारी अनूप चतुर्वेदी ने बताया कि यह फसल सिर्फ 80 दिन में तैयार हो जाती है। इसका उत्पादन करीब 250 से 300 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है। उद्यान विभाग ने निदेशालय से आलू की मांग की है। आलू का बीज प्राप्त करने के लिए किसान अपना आधार कार्ड व मोबाइल नंबर रजिस्ट्रेशन करा लें। जिससे किसानों को उनकी मांग के अनुरूप बीज की आपूर्ति कराई जा सके। निदेशालय की ओर से जारी रोस्टर के हिसाब से अक्तूबर में आलू का बीज जिले को प्राप्त हो जाएगा। कुफरी सिंदूरी, कुफरी बहार (3797), कुफूरी, चिप्सोना के बीज की मांग की गई है।
ऐसे करें तैयारी
कृषि विज्ञान केंद्र ग्वारी के प्रभारी डॉ.अनंत कुमार ने बताया कि आलू की अगेती बुआई सितंबर से प्रारंभ हो जाती है। बुआई का समय 15 से 25 अक्तूबर है। बताया कि अच्छी पैदावार के लिए जल निकास युक्त बलुआ, दोमट मिट्टी का चयन करें। खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई कर मिट्टी भुरभुरी बना दें। लाइन की दूरी 60 व पौधे से पौधे की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें। एक एकड़ खेती के लिए 12 से 14 क्विंटल रोग रहित शुद्ध बीज प्रयोग करें। प्रत्येक बीज का वजन 30 ग्राम से कम न हो। अच्छी पैदावार के लिए 70 किलोग्राम नाइट्रोजन, 35 किलोग्राम फास्फेट, 40 किलोग्राम पोटाश का प्रयोग करें।
छह हजार हेक्टेयर में होती है खेती
जिले में छह हजार हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, ऐरवाकटरा, बिधूना व सहार ब्लॉक में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। किसानों ने खेती करने के लिए खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया है।
पहले आओ, पहले पाओ
जिला उद्यान अधिकारी अनूप चतुर्वेदी ने बताया कि आलू के बीज की मांग की गई है। नगद भुगतान पर किसानों को पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर बीज का वितरण किया जाएगा। इसके लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
आलू की खेती (फाइल फोटो)। संवाद- फोटो : AURAIYA