औरैया। यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम मंगलवार को घोषित कर दिया गया। महीनों से रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्र-छात्राएं खुशी से फूले नहीं समाए। इस बार के परीक्षा परिणाम में अधिकांश स्कूलों में छात्र-छात्राओं ने अच्छे अंक पाए। हाईस्कूल में बिधूना के सीएमएस इंटर कॉलेज की अनामिका ने 97 फीसदी अंक पाकर और इंटरमीडिएट में दिबियापुर के सेंट साईंनाथ इंटर कॉलेज की छात्रा सुरभि ने 96.20 फीसदी अंक अर्जित कर जिले में टॉप किया।
जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रशेखर मालवीय ने बताया कि इस बार बोर्ड परीक्षाएं काफी सख्त माहौल में हुई थीं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी से निगरानी कर नकल विहीन परीक्षा कराई गई है। जिले में हाईस्कूल और इंटर का काफी अच्छा परिणाम रहा है। बताया कि इस बार हाईस्कूल में 25,188 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हुए थे। इनमें 22,631 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी। सोमवार को आए परिणाम में 20459 परीक्षार्थी पास हुए और परीक्षा परिणाम 90.40 फीसदी रहा।
इंटरमीडिएट में 21,505 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था। इनमें 19,133 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। इनमें से 14,837 परीक्षार्थी सफल हुए हैं। इंटर का परीक्षाफल 77.73 फीसदी रहा। उन्होंने सभी सफल हुए परीक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए बधाई दी है।
हाईस्कूल में सीएमएस इंटर कॉलेज बिधूना की अनामिका ने 600 में 582 के साथ 97 फीसदी अंक पॉकर प्रदेश की सूची में सातवें स्थान व जिले में पहले स्थान पर रहीं। दूसरे स्थान पर औरैया शहर के चौधरी विशंभर सिंह भारतीय इंटर कॉलेज की छात्रा अनुशा गुप्ता ने 600 में 578 के साथ 96.33 फीसदी अंक व एसवीएम इंटर कॉलेज दिबियापुर के अंश पाठक 600 में 578 अंक के साथ 96.33 फीसदी अंक पाकर जिले में दूसरे स्थान पर रहे हैं। तीसरे स्थान पर स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज सहार की नंदनी ने 600 में 576 के साथ 96 फीसदी अंक पाकर तीसरे स्थान पर रहीं।
इंटरमीडिएट में दिबियापुर के सेंट साईंनाथ इंटर कॉलेज की छात्रा सुरभि ने 500 में 481 अंक के साथ 96.20 फीसदी अंक पाकर प्रथम स्थान पर रहीं। दूसरे स्थान पर श्री पंडित ज्ञानदीन इंटर कॉलेज उमरैन की आकांक्षा ने 500 में 479 अंक के साथ 95.80 फीसदी अंक पाकर दूसरे स्थान पर रहीं। तीसरे स्थान स्थान पर निशा चिल्ड्रेन एकेडमी इंटर कॉलेज बेला की दीक्षा यादव 500 में 477 अंक के साथ 95.40 फीसदी अंक पाकर तीसरे स्थान पर रही। सफल हुए परीक्षार्थियों ने सफलता का श्रेय गुरुजनों व माता-पिता को दिया है