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Auraiya News: खेलों में गवाई उम्र, अब नौकरी के लिए भटक रहे खिलाड़ी

Tue, 06 Feb 2024 12:32 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
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अजीतमल। खेलों में हुनर दिखाकर स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी पाने की चाह में खिलाड़ियों ने अपनी आधी जिंदगी खेलों में शील्ड-मेडल जीतने में गवां दी, अब वही खिलाड़ी उम्र बढ़ जाने के साथ ही नौकरी के लिए भटक रहे हैं। खिलाड़ियों से बात करने पर उन्होंने अपनी पीड़ा बताई। खिलाड़ियों ने बताया कि दूर-दूर जाकर पदकों का अंबार लगा, लेकिन आज वह शोपीश बने रखे हैं।
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रोजगार के लिए भटक रहे खिलाड़ियों की जुबानी-

फोटो05एयूआरपी 18 -सतपाल सिंह गुर्जर। संवाद
गांव गंगदासपुर अयाना निवासी 28 वर्षीय सतपाल सिंह गुर्जर ने बताया कि उन्होंने एमए और बीपीएड की शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2019-20 में लगातार क्रॉस कंट्री में अपने विश्वविद्यालयी खेलों के साथ-साथ नेशनल प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग किया। खो-खो में चार बार कानपुर विश्वविद्यालयी और चार बार अंतर विश्वविद्यालय नॉर्थ जोन प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। एक बार कानपुर विश्वविद्यालय की टीम के कप्तान के रूप में भी प्रतिभाग किया। सतपाल बताते हैं कि आधी जिंदगी बीत जाने के बाद अब घर का खर्च चलाने में संकट आ रहा है। नौकरी तो छोड़िए रोजगार का कोई अवसर तक नहीं मिल रहा। कोई सुनने वाला नहीं है।
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फोटो05एयूआरपी 19-भानु प्रताप दुबे। संवाद
अजीतमल कस्बा के मोहल्ला अंबेडकरनगर निवासी 30 वर्षीय भानु प्रताप दुबे खो-खो में स्टेट लेवल के खिलाड़ी हैं। फुटबॉल में भी वर्ष 2013-14 में स्टेट टीम के सदस्य रहे। वर्तमान में उत्तर प्रदेश खो-खो एसोसिएशन व खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेशनल रेफरी भी हैं। वर्तमान में जनता इंटर कॉलेज अजीतमल में निशुल्क कोच के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। परिवार के भरण-पोषण को लेकर उन्हें संकट से जूझना पड़ रहा है। उनका कहना है कि उम्र के आधे पड़ाव पर अब रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है। कहीं कोई ठीक-ठाक काम हाथ नहीं लग रहा।
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फोटो-05एयूआरपी 20- अभिषेक दुबे। संवाद
कस्बा के मोहल्ला फिरोजनगर निवासी अभिषेक दुबे ने बताया कि जिला से लेकर प्रदेश स्तर तक क्रास कंट्री सहित मैराथन दौड़ में प्रतिभाग किया। बनारस में प्रदेश स्तर की 1400 मीटर रेस में पांचवां स्थान प्राप्त कर जिले का नाम रोशन किया था। बॉलीवाल में कानपुर मंडल की ओर से खेलते हुए झांसी में आयोजित प्रादेशिक प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर परचम फहराया था, लेकिन आज उनके पास कोई स्थाई रोजगार नहीं है और न ही किसी नौकरी में चयन हो सका है।
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