संवाद न्यूज एजेंसी
दिबियापुर। गांव उमरी में रहने वाली 110 वर्षीय बुजुर्ग महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में अपर पुलिस अधीक्षक, फारेंसिक टीम एवं पुलिस के आला अधिकारियों ने पहुंचकर जांच की। बेटे के बार बार बदलते बयानों के बाद पुलिस ने मृतका का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग की पुष्टि हुई है। इस बीच दरवाजे की चौखट से लटके बुजुर्ग महिला के शव की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने से तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। फोटो में बुजुर्ग महिला के पैर जमीन से लगे हुए देखे गए। हालांकि संवाद न्यूज एजेंसी वायरल फोटो की पुष्टि नहीं करता।
सोमवार दोपहर में उमरी में रहने वाली रामवती (110) पत्नी स्वर्गीय शंभूदयाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार लोगों के घर के पिछले हिस्से में वृद्धा के शव को चौखट पर फांसी के फंदे में लटके देखा था। जिस समय लोगों ने शव को फंदे पर लटके देखा। उस समय घर पर बेटा सुभाष और उसकी पत्नी नहीं थे। इसपर लोगों ने सुभाष को घटना की सूचना दी। शाम के समय सुभाष घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। घटना की जानकारी होने पर दिबियापुर थानापुलिस पहुंची तो शव फांसी के फंदे पर नहीं था। बेटे सुभाष के बदलते बयानों पर संदेह होने पर सोमवार देर रात अपर पुलिस अधीक्षक दिगंबर कुशवाहा, दिबियापुर थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश बाबू, उपनिरीक्षक देवेंद्र प्रसाद समेत फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। रात भर मौके पर पुलिस टीम मौजूद रही। सुबह मृतका के दिल्ली में रहने वाले बड़े बेटे सुरेश, छोटे बेटे संत कुमार एवं अन्य परिजनों के पहुंचने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। थाना प्रभारी निरीक्षक मुकेश बाबू के अनुसार शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हैंगिंग आई है। सिर पर चोटों के निशान भी है। संभवतया चोटों के निशान शव को उतारते समय आए होंगे।
इंसेट
तीन माह से उमरी में रह रहीं थी मां
दिबियापुर। मृतका के साथ रह रहे बेटे सुभाष ने बताया कि लगभग 20 वर्षों से उनकी मां दिल्ली में उनकी बड़ी बहन राजेश्वरी एवं दोनों भाइयों के साथ रहतीं रहीं हैं। बड़ी बहन राजेश्वरी के पति की मृत्यु के बाद पिछले लगभग तीन माह से वह उमरी स्थित घर में रहने लगीं थीं। दावा किया कि सोमवार की सुबह उन्हें बिधूना काम से जाना था। उनकी पत्नी बीमार रहतीं हैं। इसके चलते उन्होंने ही स्वयं तोरई की सब्जी बनाकर अपनी मां को खिलाई थी। बताया कि मूल रूप से समीप के गांव लखुनो के रहने वाले हैं और 30 वर्ष से मंडी में गल्ला बेचने का काम करते हैं।