औरैया। पिछले दिनों उन्नाव में हुए हादसे के बाद भी जिले में सवारी वाहन के तौर पर नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहीं प्राइवेट बसों पर परिवहन विभाग की नजर नहीं है। जनपद में पंजीकृत कुल 300 बसों में से तकरीबन 50 बसों की फिटनेस अभी भी लंबित है।
मजे की बात यह है कि बिना फिटनेस के फर्राटा भर रहीं बसों के संचालकों को विभाग की ओर से कई बार नोटिस जारी हो चुका है। बावजूद इसके स्थिति जस की तस है। उससे भी अहम यह है कि सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी कार्रवाई की गति को मंदा किए हुए हैं। इससे कभी भी काेई बड़े हादसे के होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
सड़क हादसों से सबक लेकर ही सड़क सुरक्षा के तमाम प्रयास किए जाते हैं। खासतौर पर बड़ी घटनाओं को लेकर परिवहन विभाग की ओर से इस संबंध में शासन स्तर से सजग भी किया जाता है। पिछले दिनाें उन्नाव में हुए बस हादसे के बाद जनपद में परिवहन विभाग का अमला कुछ खास हरकत में नहीं दिख रहा है। जिले में पंजीकृत 50 बसें बिना फिटनेस फर्राटा भर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक इन बसों के संचालकों को पिछले चार माह में दो से तीन बार नोटिस जारी हो चुकी है, लेकिन बस संचालकों पर इसका असर होता नहीं दिख रहा है।
वहीं, अधिकारी भी कार्रवाई के नाम पर नोटिस जारी करने के बाद हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाते हैं। कोई ठोस कवायद फिलहाल नजर नहीं आ रही है। हालांकि, परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम लगातार चेकिंग के दौरान इन बसों को टारगेट करती है। पकड़ने के लिए वाहन चेकिंग के दौरान अक्सर इन बसों पर नजर टिकाई जाती है। इस सबके बावजूद पिछले दो माह से इन बसों की फिटनेस को पुख्ता नहीं किया गया। परिवहन विभाग की कवायद महज नोटिस भेजे जाने तक ही सीमित है। खास बात यह भी है कि इन बसों में कुछ स्कूलों की भी बस शामिल हैं।
जिले में 50 बसें बिना फिटनेस के संचालित हो रही हैं। यह अपने आप में ही संबंधित विभाग के अधिकारियों के लिए शर्म की बात है। उससे ज्यादा शर्म की बात यह है कि लोगों की जान से खिालवाड़ हो रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव के लिए जरूरत पड़ने पर संबंधित विभाग के अधिकारी एक ही दिन में बसों की उपलब्धता करा देते हैं, जबकि ये तो महज 50 बस ही हैं। जिन्हें पकड़ने में विभागीय अधिकारियों को डेढ़ माह से भी ज्यादा समय लग रहा है।
प्राइवेट बस संचालकों की निगाहें लंबे सफर पर ज्यादा हैं। यही वजह है कि बेला, सहार व बिधूना से लेकर दिबियापुर में कई जगहों पर प्राइवेट बसों के चालक व क्लीनरों ने स्टैंड बना लिए हैं। जहां से रोजाना दिल्ली, मुंबई, आगरा, लखनऊ जैसे बड़े शहरों के रूटों पर बसें संचालित होती हैं। बड़े पैमाने पर लगेज भी सप्लाई होता है। सूत्रों की माने तो ये ज्यादातर बसें दूसरे जिलों में पंजीकृत हैं। इन बसों में फिटनेस का अभाव ज्यादा बताया जा रहा है। यहां मानकों को ताक पर रखा गया है। इन बसों को लेकर परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम के द्वारा कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई जाती। तकरीबन डेढ़ साल पहले तत्कालीन सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन रेहाना बानो के द्वारा इन बसों पर शिकंजा कसा गया था, जिसके बाद बस संचालकों में खलबली मची थी।
जनपद में कुल पंजीकृत बसों में 50 के करीब बसों की फिटनेस लंबित है। सुरक्षा के लिहाज से फिटनेस होना अनिवार्य है। इस संबंध में बस संचालकों को नोटिस भी थमाए जा चुके हैं। प्रवर्तन टीम के द्वारा चेकिंग में इन्हें पकड़ने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। -अशोक कुमार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी