संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ के रूप में भी जाना जाता है। यह एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है जिसमे विवाहित महिलाएं उपवास रखती है। ज्योतिष आचार्य पंडित दयानंद शर्मा के मुताबिक इस उपवास को माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है। इसे ‘तिल चौथ’ या ‘माहि चौथ’ भी कहा जाता है। सकट का अर्थ होता है अपभ्रंश। माना जाता है इस दिन श्री गणेश ने देवताओं की मदद कर उनके संकट को दूर किया था। जिसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया था की आज से दिन को लोग संकट मोचन के रूप में मनाएं। जो भी व्यक्ति इस दिन व्रत करेगा, उसके सभी संकट इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाएंगे। ‘वक्रतुण्डी चतुर्थी’, ‘माही चौथ’ और ‘तिलकुटा चौथ’ भी इसी पर्व के अन्य नाम है। इस दिन विद्या बुद्धि, संकट हरण श्री गणेश तथा चंद्र देव का पूजन किया जाता है। यह व्रत संकटों को दूर करने और दुखों को दूर करने वाला होता है। इस उपवास को रखने से व्रती की सभी इच्छाएं सम्पूर्ण हो जाती है। इस दिन उनके पूजन का विशेष महत्व होता है।