आज पुलिस स्मृति दिवस है। इस दिन शहीद पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। उनके त्याग, बलिदान को याद किया जाता है। जनपद में भी तीन पुलिसकर्मियों ने पुलिस सेवा के दौरान शहादत दी है। इसमें दरोगा समेत दो पुलिसकर्मी की दबिश के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई थी। जबकि एक जांबाज सिपाही का सीना मुठभेड़ के दौरान हिस्ट्रीशीटर की गोली से छलनी हो गया था। तीनों पुलिस कर्मियों का बलिदान हमेशा याद रहेगा।
पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 18 दिसंबर 2015 को हसनपुर कोतवाली में तैनात दरोगा अरविंद मलिक अपनी टीम के साथ सरकारी गाड़ी से रामपुर में दबिश देने के लिए गए थे। देररात रामपुर से दबिश देकर लौटते समय अतरासी-हसनपुर रोड पर पुलिस की बोलेरो घने कोहरे के चलते गन्ने से लदे ट्राले में पीछे से घुस गई थी। हादसे में सिपाही सुनील यादव की मौके पर ही मौत हो गई थी। जबकि दरोगा अरविंद मलिक, महिला कांस्टेबल ललिता पांचाल और कांस्टेबल संजीव कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घायलों को उपचार के लिए मुरादाबाद के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उपचार के दौरान दरोगा अरविंद मलिक ने दम तोड़ दिया था। ड्यूटी के दौरान सड़क हादसे में जान गवाने वाले दरोगा और सिपाही को शहीद का दर्जा मिला।
वहीं 27 जनवरी 2019 की शाम बछरायूं थाना पुलिस की टीम गांव इंद्रपुर में हिस्ट्रीशीटरों का सत्यापन करने गई थी। जहां हिस्ट्रीशीटर शिवअवतार यादव ने सिपाही हर्ष चौधरी को गोली मार दी। सिपाही को मुरादाबाद के टीएमयू में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। हालांकि सिपाही हर्ष की शहादत का बदला लेते हुए पुलिस की जवाबी फायरिंग में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर शिवअवतार यादव को ढेर कर दिया था।
शहीदों की पत्नियों को मिल रही पेंशन के रूप में पूरी तनख्वाह
एसपी आदित्य लांग्हे ने बताया कि ड्यूटी के दौरान शहादत देने वाले पुलिसकर्मियों की पत्नियों को पेंशन के रूप में पूरी तनख्वाह दी जा रही है। ये तनख्वाह तब तक दी जाएगी जब तक शहीद होने वाले पुलिसकर्मी पुलिस रिकॉर्ड में रिटायर्ड नहीं हो जाते। उन्होंने बताया कि सड़क दुर्घटना में शहीद होने वाले दरोगा अरविंद कुमार की पत्नी सुनीता देवी को पेंशन दी जा रही है जबकि उनके बेटे नितिन मलिक को पुलिस विभाग में नौकरी मिली है। ऐसे ही शहीद कांस्टेबल सुनील कुमार की पत्नी आरती देवी को कांस्टेबल के पद पर नौकरी मिली है। इसके अलावा उन्हें भी पेंशन के रूप में पूरी तनख्वाह दी जा रही है। वहीं शहीद कांस्टेबल हर्ष चौधरी की पत्नी अनामिका की नौकरी प्रक्रिया चल रही है। उन्हें पेंशन दी जा रही है।
25 साल की उम्र में शहीद हो गए थे हर्ष
सिपाही हर्ष चौधरी की शहादत से करीब डेढ़ साल पहले शादी हुई थी। उस समय उनकी पत्नी अनामिका पांच महीने की गर्भवती थीं। हर्ष की 2016 में पुलिस में भर्ती हुई थी। 23 मई 2017 को हर्ष की तैनाती बछरायूं थाने में हुई थी।
हर्ष चौधरी मूल रूप से हाथरस के श्यामनगर के रहने वाले थे। वह पिता प्रेम सिंह और के एकलौता सहारा थे।
सेना के जवान देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद होते हैं तो पुलिसकर्मी देश के भीतर रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर करते हैं। उनकी शहादत को सभी नहीं भुलाया जा सकता। ऐसे जांबाज सम्मान के हकदार हैं।
- आदित्य लांग्हे, एसपी अमरोहा