अमरोहा। खेती के साथ-साथ पशुपालन किसानों के लिए आमदनी की गारंटी से कम नहीं है। गांव-गांव लोग दूध का कारोबार कर तरक्की की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। शहर के नजदीक पड़ने वाले गांव के ग्रामीण ने इस व्यापार को बड़े स्तर पर फैला लिया है। यही नहीं शुद्घ दूध न मिलने के चलते शहरों में लोगों ने इसे व्यवसाय के तौर पर विकसित कर लिया है। शहरों में इसे डेयरी को रूप देकर विस्तार दिया जाने लगा है। अच्छी बात यह है कि अब धीरे-धीरे लोग इन डेयरी की ओर रूख भी करने लगे हैं। कहा जाए तो दूध भी कारोबार के रूप में अलग पहचान बना रहा है। बढ़ती खपत को देखते हुए लोगों ने इस कोरोबार को चुनना शुरू कर दिया है। -
पराग डेयरी को बेचा 74169 लीटर दूधअमरोहा के गांव चोटीपुरा निवासी व पराग सहकारी समिति के मंडलीय चेयरमैन प्रदीप चौधरी ने बताया कि वर्ष 1977 में उनके पिता ने दो पशुओं से दूध का कारोबार शुरू किया। पिता के निधन के बाद उन्होंने इस जिम्मेदारी को संभाला। आज उनके पास 150 दुधारू पशु हैं। 2018 में पराग कोआपरेटिव डेयरी को 74169 लीटर दूध की आपूर्ति कर मंडल में पहला स्थान पाया था। जिसे लेकर प्रदेश सरकार के तत्कालीन दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने उन्हें सम्मानित किया था। उनका कहना है कि दूध के इस कारोबार से 120 लोगों को रोगजार मिल रहा है।
एमएससी करने के बाद चुना दूध का कारोबार
अमरोहा नगर के मोहल्ला सुबोध नगर के रहने वाले दीपक गिरी ने एमएससी करने के बाद नौकरी करने के स्थान पर स्वरोजगार के रूप में दूध का कारोबार शुरू किया है। दो भैंस से शुरू हुए कारोबार में आज करीब 20 से अधिक दुधारू पशु हैं। दीपक गिरी ने पिता के साथ मिलकर दस वर्षो में भैंसों की संख्या में में तेजी से इजाफा किया। दीपक ने वर्ष 2019 में एमएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की और कई स्थानों पर नौकरी के लिए आवेदन किया मगर सफलता नहीं मिली। ऐसे में दूध के कारोबार को अपनाया। आज करीब 14 भैंसे, 4 गायें पाल रखी हैं। बताया कि गर्मी से पहले भैंस के दूध का रेट 65 रुपये थे जो कि वर्तमान में 70 रुपये लीटर है। वहीं गाय का दूध गर्मी से पहले 50 और गर्मी शुरू के बाद 55 रुपये बिक रहा है।
दुग्ध डेयरी के काम से मुनाफा कमा रहे चंद्रशेखर
हसनपुर। क्षेत्र के गांव भदौरा निवासी चंद्रशेखर ने चार साल पहले दुग्ध देने वालेेे दो पशु पाले थे। फिर उसने दुग्ध की डेयरी चलाने के लिए पशुओं की संख्या बढ़ाई। दो पशुओं से बढ़कर संख्या छह पशु तक पहुंच गई। दुग्ध का कारोबार बढ़ाने के लिए अब चंद्रशेखर ने अन्य पशुपालकों से भी दूध खरीदना शुरू कर दिया है। शुरू में बीस लीटर दूध से डेयरी का काम शुरू किया था। जो धीरे-धीरे बढ़कर तीन सौ लीटर तक पहुंच चुका है। दुग्ध डेयरी के काम से चंद्रशेखर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। खुद भी पशु पालते हैं और अन्य पशुपालकों को भी अधिक से अधिक पशु पालने के लिए प्रेरित करते हैं।
गगन ने बनाया मुकाम
मंडी धनौरा। क्षेत्र के ग्राम कुआं खेड़ा निवासी गगन चौधरी अपने हुनर व लगन से दूध के व्यवसाय में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। वर्ष 2013 में गगन ने मात्र दो भैंस के साथ का दूध का व्यवसाय शुरू किया था। अपनी मेहनत व लगन से उन्होंने अपने ग्राहकों का दिल जीता और अच्छी क्वालिटी का दूध सप्लाई किया। उपभोक्ताओं से मिले अच्छे फीडबैक से गगन चौधरी ने अपने पशुओं की संख्या 2 से बढ़ाकर 13 कर ली है। आज पूरे क्षेत्र में गगन चौधरी का नाम दूध व्यवसाय में बहुत ही सम्मान के साथ लिया जाता है। गगन ने बताया कि यदि कारोबार में ईमानदारी बढ़ती जाए तो उसको बढ़ने में देर नहीं लगती है।