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Amroha News: चाहे जो हो अंजाम, जमीनों का मुआवजा लेकर रहेंगे

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अमरोहा/रजबपुर। एक तरफ जहां चार गांव के ग्रामीण जमीन का मुआवजा पाने को लगातार आंदोलन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन द्वारा ग्रामीण पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयार की जा रही है। नहर खोदाई को लेकर प्रशासन का विरोध करने वाले 100 किसानों को मुचलका पाबंद कर दिया गया है। जिसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया है। उनका कहना है कि अब अंजाम चाहे जो हो, वह मुआवजा लेकर ही रहेंगे।
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गांव कूबी, मंसूरपुर, रामपुर घना और मोहनपुर के ग्रामीण मध्य गंगा नहर में अधिग्रहित की जमीन के मुआवजे को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। उन्होंने वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर चार गुना मुआवजा पाने के लिए प्रशासन से लेकर शासन तक मांग की। यहां तक की राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु तक मांगी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 13 अक्तूबर को महिलाएं भूख हड़ताल पर बैठ गईं। उन्होंने नवरात्र की पूजा वहीं पर की तो दशहरा भी वहीं मनाया। यही नहीं करवा चौथ तक का पूजन भी धरना स्थल पर किया। 29 अक्तूबर को प्रशासन ने अचानक रामपुर घना में जेसीबी और पुलिस बल के साथ नहर की खोदाई शुरू कर दी थी। जिसके बाद ग्रामीण भारी विरोध में उतर आए। दो किसानों ने डीजल उड़ेलकर आत्मदाह का प्रयास किया। वहीं महिलाएं जेसीबी के आगे लेट गईं थीं। इस मामले में प्रशासन ने 100 ग्रामीणों को मुचलकों में पाबंद कर दिया। जिसकी जानकारी मिलने पर उनका गुस्सा भड़क उठा। सोमवार को कूबी में महिलाओं की भूख हड़ताल तो जारी ही रही। वहीं बड़ी संख्या में ग्रामीण वहां एकत्र हुए। उन्होंने कहा कि प्रशासन कार्रवाई के नाम पर ग्रामीणों को डराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन डरने वाले नहीं हैं। उन्हें चाहे कोई भी सजा से गुजरना पड़े। लेकिन मुआवजा लेकर ही रहेंगे। अब दिवाली भी धरना स्थल पर ही मनाएंगे। इस दौरान आशीष चौधरी, सतपाल सिंह, नरेंद्र सिंह, महिपाल सिंह, बृजपाल सिंह, राजवीर सिंह, सतवीर सिंह, सुनीता देवी, बबली देवी, कमलेश देवी, रश्मि चौधरी, सिंपल चौधरी, आदि मौजूद रहे।

40 ग्रामीणों पर और हुई मुचलका पाबंद की कार्रवाई
आंदोलन कर रहे 100 ग्रामीणों पर पुलिस प्रशासन द्वारा ढाई-ढाई लाख के मुचलकों पर पाबंद करने की कार्रवाई की गई। वहीं, 25 से अधिक लाइसेंसी हथियार भी जमा कराए गए। सोमवार को 40 और किसानों पर मुचलका पाबंद की कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी अलका चौधरी ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर यह कार्रवाई की जा रही है।
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किसान प्रशासन से अपना हक मांग रहे हैं और प्रशासन उन पर कार्रवाई कर रहा है। जो सरासर गलत है। संगठन किसानों के साथ खड़ा है। किसानों के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। रामपाल सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू टिकैत।

कार्रवाई के नाम पर प्रशासन ग्रामीणों को डराने का प्रयास कर रहा है, लेकिन उन्हें कोई डर नहीं है। मुआवजा पाने के लिए हर परीक्षा से गुजरने को तैयार हैं। परम सिंह, ग्रामीण।

प्रशासन ग्रामीणों की भावनाओं के साथ खेल रहा है। मनमर्जी तरीके से नहर की खोदाई नहीं होने दी जाएगी। पहले मुआवजा दिया जाए, उसके बाद ही हम झुकेंगे। कोई कार्रवाई ग्रामीणों के इरादे को डिगा नहीं सकती है। मायाराम सिंह, ग्रामीण।
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हमारी जमीन जब तक उचित मुआवजा नहीं दिया जाएगा। हम पीछे नहीं हटेंगे। चाहे अंजाम कुछ भी हो। प्रशासन महिलाओं पर अत्याचार कर रहा है। ईशा देवी, ग्रामीण।

महिलाओं के आंदोलन को देखकर भी प्रशासन की आंखें नहीं खुल रही हैं। दिन रात महिलाएं भूख प्यासी जमीन की हक की लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। हम हर चुनाैती से लड़ने को तैयार हैं। राजेंद्री, ग्रामीण।
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मुचलका पाबंद की कार्रवाई मात्र शांति भंग की आशंका को देखते हुए की जा रही है। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई हुई है। मुआवजे की मांग का मामला शासन स्तर तक पहुंच चुका है। वहां से ही कोई निर्णय लिए जाने के बाद आगे की प्रक्रिया की जाएगी। राजेश कुमार त्यागी, डीएम।
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