छह साल से पक्की छत का इंतजार कर रहे लोग अब पात्रता की सूची से बाहर हो गए है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना (अल्पसंख्यक) के तहत लोगों को घर बनने की उम्मीद थी। वहीं, दोबारा सत्यापन करने गए ब्लॉक के कर्मचारियों ने किसी के घर ईंट लगी हुई, तो कहीं नींव भरी व कमरे बने देख उनको अपात्र घोषित कर दिया।
ब्लॉक क्षेत्र में वित्तीय वर्ष-2017-18 में पीएम ग्रामीण आवास योजना (अल्पसंख्यक) के तहत 34 लोगों को घर मुहैया कराने का लक्ष्य मिला था। योजना के तहत आवास सिर्फ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही मुहैया कराने का प्रावधान है। शासन की ओर से पात्र व्यक्ति को आवास बनाने के लिए 1.2 लाख रुपये दिए जाते हैं, जो तीन किश्त में मिलते हैं। प्रथम किश्त 40 हजार, दूसरी में 70 हजार और तीसरी में 10 हजार रुपये की आती हैं। लक्ष्य मिलने पर ब्लॉक के अधिकारी और कर्मचारियों को पात्र व्यक्ति तलाश करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने पात्रों को तलाश कर लिया। उनके नामों की सूची बनाकर भी भेज दी गई।
ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें सिर ढकने के लिए छत नसीब होगी। मगर, उनकी उम्मीद में शासन से राशि मिलने में हुई लेटलतीफी रोड़ा बन गई। जिन लोगों के नाम भेजे गए थे, आवास के लिए इंतजार करते-करते उनकी आंखें पथरा गईं। छह साल में घर बनाने के लिए कोई मदद नहीं मिली तो घर मिलने की आस टूट गई। किसी ने मेहनत मजदूरी कर ईंट मंगा लीं, तो कोई नींव भरवा कर बैठा। एक दो ने जैसे तैसे घर भी बना लिया। अब छह साल बाद ब्लॉक के कर्मचारी पात्रता सूची का दोबारा सत्यापन करने गए तो उनके यहां ईंट, नींव भरी देखी व कुछ घरों में कमरे बने देख कह दिया कि वह आवास पाने के पात्र नहीं रह गए हैं।
इन गांवों में बनाए थे आवास
गांव बसैली में दो लोगों की सूची भेजी गई थी, एक ने अपना पक्का घर बना लिया। मोहरका पट्टी में पांच में से चार ने, शाहपुर उर्फ साहबपुर में आठ में से एक ने, घासीपुरा में सात में से एक ने अपना घर बना लिया है। इसी तरह शकूराबाद में दो नाम भेजे गए थे, लेकिन जब घर नहीं मिला तो एक ने खुद इंतजाम किया। और भी कई गांवों से पात्रों की सूची भेजी गई थी।
- जो सूची अब तैयार की जा रही है। उसकी पात्रता के मानक पर खरे उतरेंगे, उनको आवास मुहैया कराए जाएंगे। पिछले सालों में क्या हुआ। किसके नाम सूची में भेजे गए, उनका कोई मतलब नहीं रहा। जो नई सूची में पात्र पाए जाएंगे, उनका ही चयन किया जाएगा। - अरुण कुमार, खंड विकास अधिकारी गजरौला।