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अदब की जबान है उर्दू : डाॅ. सिराजुद्दीन

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अमरोहा। हाशमी गर्ल्स पीजी काॅलेज में अंजुमन तरक्की उर्दू की तत्वावधान में अल्लामा इकबाल की पैदाइश पर एक सेमिनार यौमे उर्दू का आयोजन किया गया।
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हाशमी एजुकेशनल ग्रुप के चेयरमैन व कालेज प्रबंधक डाॅ. सिराज उद्दीन हाशमी एडवोकेट ने कहा कि अल्लामा इकबाल एक ऐसे शायर हैं जिनको अवामी शायर भी कहते हैं। आपने कौम को अपनी शायरी के जरिये एक पैगाम दिया। अल्लामा इकबाल के पूर्वज कश्मीरी ब्राह्मण थे, मगर बाद में इस्लाम कुबूल कर लिया था। अल्लामा इकबाल की यौमे पैदाइश यौमे उर्दू पर हमें अपने घरों में उर्दू का माहौल पैदा करना चाहिए तथा उर्दू के फरोग को अधिक से अधिक बढ़ाना देना चाहिए। इकबाल की उम्र 4 साल 4 महीने की हो गई तो दीनी तालीम हासिल करने के लिए उन्हें मकतब में बैठा दिया। अपने वतन से मोहब्बत की मिसाल उनके तराने सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा में मिलती हैै। प्राचार्या डाॅ. रिजवाना कुलसुम ने कहा कि उर्दू अदब की तारीख में सैकड़ो ऐसे शायर हुए हैं, जिन्होंने हयाते जावेद हासिल की है। इकबाल एक ऐसा शायर है जो कि उर्दू अदब में हिन्दुस्तान का ही नहीं बल्कि तमाम दुनिया का शायर है। वो किसी एक कौम का शायर नहीं खतीब, फलसफी, मौर्रिख सभी कुछ है। इस दौरान उर्दू विभागाध्यक्ष सईद अहमद, व कॉलेज स्टाफ मौजूद रहा।
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