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हर चौथे मरीज को टायफाइड, प्लेटलेट्स हो रहे कम

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बदलते मौसम में वायरल बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। लोग टायफाइड के शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 80 आशंकित लोगों लोगों की जांच हो रही है। जिसमें हर चौथा मरीज की जांच रिपोर्ट टाइफाइड पॉजिटिव आ रही है। इतना ही नहीं उनकी प्लेटलेट्स भी कम हो रहे हैं।
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जुलाई माह की शुरूआत से बुखार तेजी से पैर पसार रहा है। टायफाइड के मरीज भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब 80 लोगों की जांच हो रही है। जिसमें बीस मरीज टायफाइड के निकल रहे हैं। उनकी प्लेटलेट्स भी कम आ रहे हैं। ऐसे में मरीज भयभीत हैं। कई लोग जानकारी के अभाव में या फिर झोलाछाप डॉक्टरों की सलाह पर डेंगू की जांच करा रहे हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ.चरन सिंह ने बताया कि टायफाइड एक गंभीर बीमारी है। यह साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी बैक्टीरिया से होता है। दूषित जल और खुले में रखे खाद्य पदार्थों के सेवन से यह बैक्टीरिया व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करता है। इससे बुखार, सिर दर्द, उल्टी दस्त और शरीर में जकड़न होती है।
टायफाइड पीड़ित व्यक्ति को बुखार घटता-बढ़ता रहता है। उन्होंने बताया कि प्लेटलेट्स कम होने का मतलब डेंगू होना नहीं होता। जनरल फिजिशियन डॉ.फाइक अली ने बताया कि प्लेटलेट्स डेंगू के साथ ही वायरल बुखार, मलेरिया, चिकनगुनिया, किडनी और लीवर फेलियर आदि में भी कम हो सकता है।
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उन्होंने बताया कि सामान्य व्यक्ति में प्लेटलेट्स की संख्या डेढ़ लाख से साढ़े चार लाख तक होती है लेकिन मरीज में प्लेटलेट्स 25 से 50 हजार तक आने पर लोग घबरा जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्लेटलेट्स दस हजार भी है तो घबराने की जरूरत नहीं है, बशर्ते शरीर के किसी हिस्से से ब्लीडिंग न हो। मगर योग्य चिकित्सक से इलाज जरूरी है।
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