अमरोहा। कलक्ट्रेट के राजस्व अभिलेखागार में 15 साल की अलग-अलग खतौनी के मूल पृष्ठ फाड़कर कूटरचित दस्तावेज चस्पा करने के मामले में डीएम के आदेश पर एडीएम न्यायिक ने विभागीय जांच शुरू कर दी है। डीएम ने राजस्व अभिलेखापाल और सहायक अभिलेख पाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा है। जबकि पुलिस की ओर से मुकदमे की विवेचना एसएसआई कर रहे हैं।
जमीन हड़पने के उद्देश्य से शातिरों ने कलक्ट्रेट सभागार के राजस्व अभिलेखागार में रखे अभिलेखों में छेड़छाड़ कर दी। करीब 15 साल की अलग-अलग खतौनी के मुख्य पृष्ठों को फाड़कर कूटरचित दस्तावेज चस्पा कर दिए। कूटरचित खतौनी के दस्तावेजों में जमनिया के रहने वाले लाल सिंह का नाम मृत दर्शाकर बाद में उनके बेटे यशपाल सिंह का नाम वारिस के रूप में अंकित कर दिया था। डिप्टी कलक्टर की जांच रिपोर्ट और हसनपुर तहसीलदार की आख्या के आधार पर देहात पुलिस ने नौगावां सादात के सफाई कर्मचारी और कूटरचित दस्तावेजों में वारिस के रूप में अंकित यशपाल सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। साथ ही कई अधिवक्ताओं, मुंशी और कलक्ट्रेट के ही अधिकारी कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध माना था। मुकदमे की जांच देहात थाने के एसएसआई संजय कुमार कर रहे हैं। जबकि डीएम राजेश कुमार सिंह ने प्रकरण को गंभीरता से लेकर प्रकरण की विभागीय जांच एडीएम न्यायिक मायाशंकर यादव को सौंपी है। डीएम की ओर से राजस्व अभिलेख पाल और सहायक अभिलेख पाल को नोटिस देकर 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही दोनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
वर्ष 2019 से वर्ष 2021 के बीच कृषि भूमि जुड़े रिकाॅड में गई छेड़छाड़
जनपद की ओवरऑल जमीन का रिकॉर्ड कलक्ट्रेट के राजस्व अभिलेखागार में डीएम के संरक्षण में रहता है। राजस्व अभिलेखों की देखरेख के लिए राजस्व अभिलेख पाल, सहायक राजस्व अभिलेख पाल, राजस्व अभिलेखाकर की अभिरक्षा में रहते हैं। लेकिन वर्ष 2019 से वर्ष 2021 के बीच हसनपुर बाहर चुंगी की कृषि भूमि गाटा संख्या 386 की वर्ष 1394-1399 फसली खतौनी खाता संख्या 284 के मूल पृष्ठ के चार आदेशों को फाड़ लिया गया। उनके स्थान पर फर्जी आदेश तीन नवंबर 1987 के अंतर्गत लाल सिंह निवासी जमानिया तहसील अमरोहा का नाम दर्ज कर दिया। जबकि ये हसनपुर तहसील के रिकॉर्ड में अंकित नहीं है। आरोपियों ने वर्ष 1400-1405 फसली के खाता संख्या 310 के मूल पृष्ठ को फाड़कर अभिलेखों में मूल पृष्ठ पर फर्जी तरह से खातेदार के रूप में लाल सिंह का नाम दर्ज करा दिया और बाद में लाल सिंह को मृत दर्शाकर उसके बेटे यशपाल सिंह का नाम वारिस में अंकित कर दिया गया। इसके अलावा खतौनी वर्ष 1406-1411 फसली खाता संख्या के 303 कॉलम नंबर दो से दाताराम के मूल पृष्ठ को फाड़कर कूटरचित दस्तावेज चस्पा कर दिए।
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