जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुमताज अंसारी ने कहा कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं हैं। एक निर्धारित अवधि तक दवाई खाने पर टीबी रोग पूर्ण रूप से सही हो जाता है। लेकिन, लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। जनवरी माह से अब तक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 2148 टीबी के मरीज चिह्नित किए गए हैं। इस समय जनपद में 2774 टीबी के मरीज हैं।
जनपद में क्षय रोग विभाग लगातार टीबी संवेदीकरण अभियान चला रहा है। क्षय रोग विभाग के जिला कार्यक्रम समन्वयक राजू यादव और पीपीएम अजय कुमार ने जिले के ग्राम डिडौली में घर-घर जाकर के टीबी रोग के प्रति लोगों को जागरूक किया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मुमताज अंसारी ने बताया कि क्षय रोग विभाग की टीम ने जांच व उपचार संबंधी नि:शुल्क सेवाओं के बारे में घर घर जाकर जागरूक किया। उन्होंने बताया कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। बीमारी को छुपाने से संक्रमण अन्य लोगों में भी फैलता है, इसलिए इसकी जांच और उपचार पूरी तरह नि:शुल्क है। घबराएं नहीं, अपना इलाज करवाएं। निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत समस्त चिह्नित एवं उपचारित क्षय रोगियों को 500 रुपये न्यूट्रीशन सपोर्ट के लिए प्रति माह का भुगतान डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का सपना देखा है। टीबी के इलाज में पिछले कुछ वर्षों से बहुत प्रगति हुई है। जनपद में जनवरी माह से अब तक सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 2148 टीबी के मरीज चिह्नित किए गए हैं। 626 टीबी मरीज प्राइवेट अस्पतालों में चिह्नित किए गए हैं। इस समय जनपद में 2774 टीबी के मरीज हैं। 700 टीबी के मरीजों को गोद लेने का लक्ष्य मिला था जिसमें से 1200 टीबी के मरीजों को गोद 120 निक्षय मित्रों ने लिया है।