साढ़े 21 महीने बाद भी दिल्ली-लखनऊ हाईवे के 20 किमी लंबे हिस्से का चौड़ीकरण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। बेहद धीमी गति से चल रहा चौड़ीकरण का निर्माण कार्य कार्तिक पूर्णिमा पर तिगरी में लगने वाले गंगा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की भी परेशानी का कारण बनेगा।
दिल्ली-लखनऊ हाईवे को सिक्सलेन बनाने का कार्य बीते कई साल से किया जा रहा है। जिसका निर्माण आईआरबी मुरादाबाद हापुड़ टोलवे लिमिटेड कंपनी करा रही है। निर्माण करा रही कंपनी ने गजरौला से मुरादाबाद का काम लगभग पूर्ण करा दिया है लेकिन गजरौला से ब्रजघाट के बीच का 20 किमी का हिस्सा ही सिक्सलेन से रह गया है। कारण इसमें वन विभाग का अडंगा लगा था। हस्तिनापुर वन सेंचुरी के अंतर्गत आने के कारण भारत सरकार से एनओसी लेनी अनिवार्य थी। मगर पांच सौ पेड़ होने के कारण एनओसी नहीं मिल रही थी। 23 दिसंबर-2020 को एनओसी लेने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने 20 किमी लंबे हाईवे का चौड़ीकरण शुरू किया। इस निर्माण कार्य को करीब साढ़े 21 महीने हो गए, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका है। जिसका खामियाजा कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले तिगरी गंगा मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ सकता है। तिगरी मेले को आने जाने वाले लाखों श्रद्धालु कांकाठेर और ओसीता जगदेवपुर से होकर गुजरते हैं। मगर हाईवे पर शहवाजपुर डोर के निकट टूटी पुलिया के कारण हाईवे संकरा है। इस कारण यहां से वाहन रेंग-रेंगकर गुजरते हैं।
20 किमी के दायरे में हाईवे पर पांच सौ पेड़ खड़े थे। हाईवे चौड़ीकरण के लिए इन 500 पेड़ों को काटा जाना अनिवार्य था। मगर हस्तिनापुर सेंचुरी के अंतर्गत होने के कारण पेड़ कटान के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना आवश्यक था। जिसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने केंद्रीय वन मंत्रालय से गुहार लगाई। खासी मशक्कत के बाद वन विभाग से 23 दिसंबर-2020 को वन विभाग ने एनओसी जारी की। इसके बाद पेड़ों का कटान कर चौड़ीकरण का काम शुरू किया गया।
अब हाईवे चौड़ीकरण का कार्य बेहद तेजी से चल रहा है। टूटी पुलिया के फाउंडेशन बन रहे हैं। जून-23 तक कार्य पूर्ण हो जाएगा।
हेमंत पारीक, जीएम, आईआरबी मुरादाबाद हापुड़ टोलवे लिमिटेड