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प्रदेश के पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दिखेगा अमरोहा के तिगरी गंगा मेला का दृश्य

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गजरौला (अमरोहा)। कार्तिक पूर्णिमा पर लग रहे तिगरी गंगा मेले की भव्यता और उसमें होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को घर बैठे देख सकेंगे। प्रात:कालीन गंगा में डुबकी लगाने वाले लाखों श्रद्धालुओं का हर हर गंगे का उदघोष भी सुन और देख सकते हैं। मेले की भव्यता का आनंद लेने से भी वंचित नहीं रह सकते। मेले में होने वाला प्रत्येक सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम प्रदेश के पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।
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सैकड़ों साल से तिगरी में गंगा किनारे लगता आ रहा कार्तिक पूर्णिमा गंगा मेले आस्था का केंद्र है। कई दिन तक तिगरी गंगा तट पर तंबुओं का शहर बस जाता है। तिगरी गंगा मेले में जहां लाखों श्रद्घालु पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाने आते हैं, वहीं मेला लाखों लोगों के रोजगार का भी जरिया बनता है। दस दिन तक चलने वाले मेले में विभिन्न समाजों की महासभाओं में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम मन को मोह लेते हैं। वहीं अपनों से बिछड़े लोगों को मिलाने के लिए जद्दोजहद करते स्काउट गाइड भी अपनी सेवा सेवा से लोगों का दिल जीत लेते हैं। श्रद्घालुओं के तंबुओं और डेरों में खिचड़ी की सुगंध अलग ही स्वाद का अहसास कराती है। मेले का जिक्र सामने आते ही उसे देखने की लालसा जागृत हो जाती है, लेकिन तमाम कारणों के चलते हर कोई मेले में नहीं जा सकता। कहीं पर भी रहने वाले लोग मेले की भव्यता को देख सकें, इसके लिए प्रदेश की पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर मेले का विवरण और उसमें होने वाले सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम उपलब्ध होंगे। क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा ने तिगरी गंगा मेले में होने वाले सांस्कृतिक, धार्मिक कार्यक्रमों को पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कराने और दिखाने के लिए प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को पत्र लिखा है। विधायक का कहना है कि पर्यटन मंत्री ने हां कर दी है। पूरे मेले की कवरेज की जाएगी और वह पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दिखेगी।
मेले में दिखता है संस्कृतियों का संगम
गजरौला। तिगरी गंगा मेले में तमाम संस्कृतियों का संगम दिखाई देता है। मेले में जहां सिख समुदाय के शिविर में हजारों लोग लंगर छकते हैं, वहीं बृह्मकुमारी आश्रम और जय गुरुदेव आश्रम में लोग शांत चित्त से सत्संग सुनकर आध्यात्म से जुड़ने की कोशिश करते हैं। गंगा किनारे धार्मिक अनुष्ठान को देख लगता है कि यहां पर पूरी दुनिया धार्मिक वातावरण में रंग गई है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम समुदाय के हजारों लोग अपने उत्पाद बेचने के साथ ही समाज सेवा का काम करते हुए एकता और भाईचारे की रस्सी को मजबूत करते हैं
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