अमरोहा/हसनपुर। कर्मियों की हड़ताल और मौसम में आए बदलाव से बाधित हुई बिजली आपूर्ति लोगों को 36 घंटे बाद मिल सकी, जिससे शहर से ग्रामीण इलाकों तक बिजली संकट के हालात बन रहे। परेशान लोग मोबाइल फोन चार्ज करने से लेकर पानी तक को तरसते रहे।
शुक्रवार से ही जारी अघोषित बिजली कटौती के कारण स्कूलों से लेकर अस्पताल, सरकारी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों तक हालात बदतर नजर आए। कारोबार प्रभावित होने से बड़े व्यापारियों समेत छोटे दुकानदारों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। रविवार को विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सांकेतिक हड़ताल से तीसरे दिन बिजलीघरों में काम ठप रहा। सुबह सैकड़ों कर्मचारी फिर से कलक्ट्रेट बिजलीघर पहुंचकर धरने पर बैठ गए। बिजलीघरों पर सप्लाई बंद होने से जिले के सभी उपखंडों, फीडरों और स्थानीय बिजलीघरों पर आपूर्ति बंद होने से शहर से गांवों तक लगभग ब्रेकडाउन के हालात नजर आए। अमरोहा शहर के गुलड़िया, दाउद सराय समेत उपखंड-1 व 2 पर सप्लाई बंद होने से रात दो से सुबह छह बजे फिर दस से 12 बजे तक लंबे पावरकट के चलते शहर के कई मोहल्ले में लोगों को पेयजल की परेशानी उठानी पड़ी। उधर, अहरोई बिजलीघर पर सप्लाई ठप होने से रविवार को भी दो दर्जन से ज्यादा गांवों व शहर के कई मोहल्लों में 14 घंटे बाद भी बिजली व्यवस्था चरमराई रही। हसनपुर, ढबारसी, बुरावली, रहरा, आदमपुर बिजलीघरों ठप पड़े रहे। इन बिजलीघरों को 32 घंटे के लंबे अंतराल के चलते रविवार दोपहर बाद बिजली आपूर्ति सुचारू हो सकी। हालांकि प्रशासन के हस्तक्षेप से बीच-बीच में कटौती, फाल्ट जैसी समस्या दुरुस्त कराई जाती रही। दोपहर बाद ज्यादातर मांगें मानी जाने के आश्वासन के बाद समिति पदाधिकारियों के निर्देश पर हड़ताल समाप्त कर कर्मचारी काम पर वापस लौट आए। हड़ताल समाप्त होने पर लोगों ने राहत की सांस ली। हड़ताल पर रहने वालों में मुख्य रूप से शिवम, नीरज कुमार, गुरमीत सिंह, सुरेंद्र यादव, नरेश कुमार, दयाशंकर, साहिल गांधी, परवेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।