गजरौला। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश से गंगा का जलस्तर भी बढ़ रहा है। ऐसे में बृहस्पतिवार रात बिजनौर बैराज से 122816 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का जलस्तर 30 सेंटीमीटर बढ़ गया है। इससे गेज 200.30 मीटर हो गया। जो खतरे के निशान से 1.70 मीटर दूर है। इससे निचले इलाकों के खेतों में पानी भरने लगा है।
दो दिन में गंगा का जलस्तर 50 सेंटीमीटर बढ़ जाने के कारण टापू में बसे गांवों के ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ने लगी है। उनको खेतों में खड़ी हरे चारा, सब्जी, मक्का आदि फसल नष्ट हो जाने का डर सताने लगा है। पिछले सप्ताह तिगरी में गंगा का जलस्तर 200 मीटर दर्ज किया गया। जबकि, बीते बुधवार को जलस्तर 199.80 मीटर दर्ज किया गया था। गंगा में 20 सेंटीमीटर की वृद्धि बिजनौर बैराज से 118903 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण हुई। बृहस्पतिवार की शाम बिजनौर बैराज से फिर 122816 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जिससे शुक्रवार को जल स्तर में 30 सेंटीमीटर का इजाफा हो गया। गंगा का जलस्तर 200.30 मीटर दर्ज किया गया।
बाढ़ खंड के जेई सुभाष चंद्र गहलौत का कहना है कि बिजनौर बैराज से पानी छोड़ा जाने के कारण जलस्तर 30 सेंटीमीटर बढ़ कर जलस्तर 200.30 मीटर हो गया है। यह खतरे के निशान 202 मीटर से 1.70 मीटर दूर है। पहाड़ों पर बारिश होती रही तो जलस्तर और बढ़ सकता है।
चारा लाने के लिए पानी से होकर गुजर रहे ग्रामीण
दो दिन में गंगा का जल स्तर 50 सेंटीमीटर बढ़ जाने से निचले इलाकों के खेतों में बाढ़ का पानी भरने लगा है। टापू में बसे दारानगर, शीशोवाली, भुड्डी वाली, जाटों वाली, मंदिर वाली आदि गांवों के ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है। उनको खेतों में खड़ी हरे चारे, मक्का, सब्जी आदि की फसल नष्ट होने का डर सता रहा है। शीशोवाली और ओसीता जगदेवपुर के ग्रामीणों को खेतों से चारा आदि लाने में खासी परेशानी सामने आ रही है। शीशोवाली गांव के ग्रामीण नाला पार कर चारा लाने को मजबूर हैं तो ओसीता जगदेवपुर के ग्रामीणों को गांव से खेतों में जा रहे मुख्य मार्ग पर भरा पानी पार करना पड़ रहा है। मार्ग में दो फीट पानी भरा है।