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Amroha News: वोटों के बदले आंकड़े से रोचक होगा अमरोहा अध्यक्ष पद का मुकाबला

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अमरोहा। नए परिसीमन के बाद अमरोहा नगर पालिका के बदले जातिगत आंकड़े से अध्यक्ष पद का चुनाव रोचक होगा। बदले समीकरण से कई दावेदार धराशायी हो गए। लेकिन कई नई आंकड़े को देखकर जीतने की ख्वाब लेकर मैदान में उतरे हैं। अब तक अमरोहा पालिका की कुर्सी पर मुस्लिम अध्यक्षों का दबदबा रहा है। जिसमे 5 हिंदू और 12 मुस्लिमों ने बागडोर संभाली है। अब 18वें चेयरमैन को लेकर मतगणना के दिन अचंभित करने वाले परिणाम सामने आ सकते हैं। इसके लिए प्रत्याशियों के बीच जद्दोजहद जारी है।
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138 साल की नगर पालिका के 17 चेयरमैन बने। अब नए सीमा विस्तार से नगरपालिका का पूरा भूगोल ही बदल गया है। 45 गांव शामिल होने के बाद नगर पालिका क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या घट गई है। जबकि हिंदू मतदाताओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। अब मतदाताओं के बदले चक्र से अध्यक्ष पद के दावेदारों के समीकरण भी बदल गए हैं। कहा जाए तो अब इस सीट पर पहले जैसे समीकरण नहीं रहेंगे। प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला होगा। नगर पालिका का पूरा भूगोल ही बदल गया है। नगर पालिका के आकड़ों की बात करें तो पिछले चुनाव 2017 में कुल 144363 मतदाता थे, जिसमें से 73.80 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता थे। हिंदू मतदाता केवल 26 फीसदी ही थे। नए सीमा विस्तार के बाद कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 197369 हो गई है, जिसके बाद मुस्लिम मतदाताओं की संख्या घटकर 53. 44 प्रतिशत रह गई है। हिंदू मतदाता 26 से बढ़कर 44. 56 प्रतिशत हो गए हैं।
उस दौर में भी देखने को मिलती थी हिंदू-मुस्लिम भाईचारा
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अमरोहा नगर पालिका गठन के बाद 1924 में निर्वाचित मेंबरों से ही चेयरमैन चुनने का अधिकार मिला था। अमरोहा में शुरू से ही हिंदू मुस्लिम दोनों संप्रदाय के लोगों के बीच आपसी भाईचारा व सौहार्द का अनुकरणीय समन्वय रहा है। इस दौरान हिंदू मुस्लिम में ये सहमति बनी कि शहर के हित को देखते हुए बारी-बारी से हिंदू व एक मुस्लिम चेयरमैन बनाया जाए। मुस्लिमों में भी एक सिया और दूसरा सुन्नी चेयरमैन बनाने का फैसला लिया गया। इस फैसले के आधार पर 1924 में साहू वेंकटेश प्रसाद को महानगर पालिका का पहला अध्यक्ष चुना गया था। लेकिन वर्ष 1995 में अध्यक्ष पद के लिए नई व्यवस्था लागू हुई और इसके बाद जनता ही चुनाव करके अध्यक्ष चुनती हैं।
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