अमरोहा। शहर में कई स्थानों पर दामाद-ए-रसूल हजरत अली की शहादत पर मजलिसों का सिलसिला चला। सहरी के बाद गमगीन माहौल में जगह-जगह शबीह-ए-ताबूत बरामद हुए। शहादत का वाकया सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं। फिजा में रातभर या अली-या अली सदाओं की गूंज आती रही।
नगर के मोहल्ला शफातपोता स्थित इमाम बारगाह हुसैनिया में मौलाना डाॅ. सैयद अहसन अख्तर सरोश ने मजलिस को संबोधित किया। शहादत का बयान सुनकर मजलिस में या अली-या अली की सदाएं बुलंद होने लगी। जुलूस में अंजुमन बनी हाशिम ने नौहा पढ़ा। वहीं, सोमवार को नमाज फज्र के बाद से ही मस्जिदों और इमाम बारगाहों में मजलिस और ताबूत की जियारत का सिलसिला शुरू हो गया। मोहल्ला दानिशमंदान स्थित मस्जिद फैज बाकर से भी जुलूस बरामद हुआ। जो इमाम बारगाह वजीर-उन-निसा पहुंचकर संपन्न हुआ।
मोहल्ला लकड़ा व मोहल्ला मजापोता स्थित इमाम बारगाह में भी हजरत अली का ताबूत निकाला गया। उलेमाओं ने हजरत अली की जिंदगी और उनकी तालीमात पर रोशनी डालते हुए शहादत का बयान पेश किया। वहीं, कई स्थानों पर हजरत अली की याद में आयोजित मनकबती महफिल में भी उनकी शान में कलाम पेश किया गया। इफ्तार के बाद घरों में शुरू हुआ नजर का सिलसिला फिर देर रात तक जारी रहा।