अमरोहा। आज के दौर में जहां बच्चों की टाॅफी भी एक रुपये में मिलती है, वहीं गर्मी की मार के बीच एक किलो टमाटर उस टॉफी के दाम में बिक रहे हैं। बाजार में थोक में इस दाम में टमाटर बिकने से किसान हताश और परेशान है। कहा जाए तो गर्मी का ताप टमाटर पर पड़ रहा है और किसान फसल को बेचने के बजाए सीधे कूड़े फेंकने को मजबूर है। अब ऐसे में कई किसानों ने टमाटर की खड़ी फसल उजाड़कर दूसरी फसल की बुवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
तापमान में बढ़ोतरी के कारण जल्दी पकने से मंडी में टमाटर की आवक बढ़ गई है। इससे टमाटर का भाव धड़ाम हो गए हैं। थोक में डेढ़ से दो रुपये किलो के हिसाब से ही आढ़ती टमाटर खरीद रहे हैं। इससे किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। जिसके चलते किसान टमाटर फेंकने को मजबूर है। वहीं फुटकर में टमाटर 10 से 15 रुपये किलो बिक रहा है। जिले में बंबूगढ़, किशन गढ़, सुदनपुर, हैबतपुर, सलारपुर, लंबिया, पपसरा, अतरासी समेत कई गांवों में टमाटर की खेती होती है। किसानों का कहना है कि सर्दी में 20 से 30 रुपये प्रति किलो के भाव में टमाटर बिक रहा था, लेकिन गर्मी में दिन का तापमान बढ़ने से टमाटर जल्द पक रहा है। पका टमाटर अधिक समय तक रोका नहीं जा सकता। इसको लेकर सब्जी मंडी में टमाटर की आवक बढ़ गई है। इसकी वजह से थोक में टमाटर के भाव धड़ाम हो गए हैं।
शहर से सटे गांव किशनगढ़ निवासी उम्मेद सिंह ने बताया कि वह मंडी टमाटर बेचने पहुंचे तो किराया और कमीशन काटकर जेब में डेढ़ रुपये किलो के पैसे भी नहीं आए। मंगलवार को टमाटर 40 रुपये प्रति कैरेट (25 किलो टमाटर) बिका। मोहल्ला वासुदेव नगर निवासी किशन सैनी भी डेढ़ क्विंटल टमाटर बेचने पहुंचे। खेतों से ही छांटकर अच्छे टमाटर लाए, लेकिन खरीददारों ने टमाटर को हरा-पीला और किसी को ज्यादा लाल बताकर फेंक दिया। वह टमाटर भी सड़क पर फेंक दिए गए, जो साफ-सुथरे और खाने योग्य थे। यही हाल मंडी में आए दूसरे किसानों का था।
डेढ़ रुपये प्रति किलो पर खरीद रहे हैं आढ़ती
बाजार में रेट गिरने से टमाटर को कोई पूछ नहीं रहा है। सब्जी आढ़ती मोहम्मद चांद राइन ने बताया कि बाजार में बहुत अधिक टमाटर आ रहा है। थोक में एक कैरेट टमाटर 40 से 50 रुपये में मिल रहा है। एक कैरट में 25 किलो टमाटर आता है। किसान का टमाटर केवल सवा रुपये से डेढ़ रुपये प्रति किलो पर आढ़ती खरीद रहे हैं।
उजाड़ दी फसल, दूसरी सब्जियों से उम्मीद
कल्याणपुरा निवासी बब्लू और जगदीश ने भी अच्छी किस्म के टमाटर उगाए थे, लेकिन फसल आते ही निराशा हाथ लगी। जगदीश की मानें तो सुबह से शाम तक बैठकर ग्राहक आने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन टमाटर के खरीदार नहीं के बराबर है, जो दाम बोले जा रहे है, उससे मजदूरी भी नहीं मिल रही है। बब्लू ने बताया कि तीन दिन पहले टमाटर की खेती उजाड़ दी है। अब टमाटर के घाटे को दूसरी सब्जियों से पूरा करने की उम्मीद है।
आंकड़ों पर एक नजर
- जिले में करीब 500 बीघा उत्पादन
- 12 हजार रुपये प्रति बीघा की लागत
- वर्तमान में डेढ़ से दो रुपये प्रति किलो बिक्री
टमाटर का अमरोहा में बड़ा उत्पादन है। अमरोहा का टमाटर दूर-दराज तक जाता है, लेकिन बिचौलियों के कारण किसानों को टमाटर का सही दाम नहीं मिल पा रहा है। किसानों से मिलकर उनकी समस्याओं पर बात करूंगा और उनकी समस्याओं को दूर कराने के लिए सरकार के सामने बात रखी जाएगी।
- कुंवर दानिश अली, सांसद
पहले मौसम की मार, अब रुला रही कीमत
टमाटर जैसी सब्जियां गर्मी में दूसरे दिन ही खराब हो जाती हैं। खपत कम होने के कारण रेट कम मिल रहे हैं। कीमत में अचानक गिरावट आने से नाराज किसानों ने टमाटर को कूड़े में फेंकना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि पहले बेमौसम बारिश ने फसल को तबाह किया और अब कम रेट ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई किसानों ने तो साहूकार से उधार लेकर खेती की है। अब लागत नहीं निकाल पाने की वजह से वह कर्ज में डूब गए हैं।
मंडी से निकलते ही बढ़ जाते हैं टमाटर के दाम
भले ही किसान अपनी फसल को सस्ते दामों पर बेचने को मजबूर हों, लेकिन मंडी समिति से निकलते ही टमाटर की कीमत बढ़ जाती है। किसान का टमाटर डेढ़ से दो रुपये प्रति किलो बिक रहा है, जबकि यहीं टमाटर फुटकर में 10 से 15 रुपये किलो बिक रहा है। साथ ही अन्य सब्जी और फलों के दामों में मंडी और फुटकर में भी दोगुना अंतर मिलता है। किसान से खुलेआम लूट हो रही है।
क्या बोले किसान
किसान मुकेश ने बताया कि टमाटर की खेती करने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है, जबकि इस बार किसान घाटे की ओर जा रहा है। जिसका मुख्य कारण है टमाटर का उचित दाम न मिलना। जब दाम नहीं मिला तो कई किसानों ने खड़ी फसल को उजाड़ दिया है। अब दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई की उम्मीद है।
किसान कपिल कुमार का कहना है कि टमाटर की खेती करने में लगभग एक बीघा जमीन में 20 हजार रुपये की लागत आ जाती है। जबकि मौजूदा समय में एक बीघा में लगभग 100 से 120 कैरेट टमाटर निकल रहा है। इस हिसाब से एक बीघा की फसल से छह हजार रुपये मिल रहे हैं। इससे किसान को भारी नुकसान है।
किसान उत्तम सिंह का कहना है कि इस बार फसल में काफी दवाइयां लगानी पड़ी, जिससे लागत अधिक आई है। जबकि उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। स्थिति ये हो गई है कि टमाटर को कूड़े के ढेर में फेंकना मजबूरी बन गई है।
किसान चिंकू का कहना है कि 30 से 40 रुपये प्रति कैरेट के हिसाब से टमाटर बिक रहा है। जिससे लागत भी नहीं निकल पा रही है। इस साल टमाटर की खेती में किसान ने मेहनत बहुत की है। टमाटर की खेती नुकसान का सौदा साबित हुआ है। इससे सभी किसान परेशान हैं।