जिले में गन्ने का रकबा 97,705 हेक्टेयर में है। बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं। लेकिन, इस बार चोटी भेदक कीट गन्ने की फसल को प्रभावित कर रहा है। जो गन्ना किसानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। कृषि रक्षा विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्रपाल सिंह बताते हैं कि आमतौर पर चोटी बेधक कीट जून माह से सितंबर तक अधिक रूप से फसलों को प्रभावित करता है। इस रोग में गन्ने के पौधे के ऊपरी भाग को छिन्न भिन्न कर देता है, जिससे चलते गन्ने की ऊपरी पत्तियां सफेद पड़कर सूखने लगती है। यह कीट नमी के चलते अधिक बढ़वार करता है। ठंड बढ़ने के साथ ही इसका प्रकोप धीरे धीरे कम होने लगता है। इस कीट के कारण फसल की पैदावार पर फर्क पड़ता है और किसानों को हरे चारे के लिए भी जूझना पड़ता है। कृषि रक्षा विभाग द्वारा समय समय पर इससे बचाव के लिए किसानों को बताया भी जाता है।
ऐसे अंतर करें चोटी भेदक और पोक्का बोइंग रोग में अंतर
डॉ. राजेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि गन्ने के लिए दोनों बीमारी लगभग एक जैसी ही होती हैं। चोटी भेदक रोग में गन्ने की ऊपरी पत्तियों को खींचने पर पूरा अगोला बाहर आ जाता है, जबकि पोक्का बोइंग रोग में ऐसा नहीं हाेता है। पोक्का बोइंग रोग में नई पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। पौधे की गोभ की पत्तियां अन्य पत्तियाें से छोटी रह जाती हैं। पोक्का बाेइंग रोग का प्रकोप बढ़ जाने पर शीर्ष भाग में पीलापन, लालपन दिखाई देता है।
ऐसे करें उपचार
कृषि रक्षा विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र पाल सिंह बताते हैं कि चोटीभेदक कीट से बचाव के लिए कारटॉप हाइड्रोक्लोराइड चार प्रतिशत का एक हेक्टेयर फसल में 20 किलोग्राम का छिड़काव करना चाहिए।