अमरोहा। मौलाना नसीम अहमद ने कहा कि रमजान के महीने में एक ऐसी मुबारक रात भी होती है, जिसे अल्लाह ने हजारों रातों से ज्यादा अफजल और बेहतरीन बताया। इस रात को ही शब-ए-कद्र कहते हैं।
तहसील वाली मस्जिद में मंगलवार रात तरावीह की नमाज में कुरान-ए-करीम मुकम्मल हुआ। पेश इमाम हाफिज गुलाम मुर्तजा ने कुरआन मुकम्मल किया। मौलाना नसीम अहमद व मौलाना तनवीर उल कादरी कादरी ने संयुक्त रूप से कहा कि अल्लाह ने हाफिज-ए-कुरान को दुनिया और आखिरत में बड़ा ओहदा दिया है। शब-ए-कद्र की रात को अल्लाह ने कुरआन-ए-करीम नाजिल किया। इसी वजह से यह रात खास इबादत वाली रात मानी जाती है। कुरान-ए-करीम अल्लाह की आखिरी व मुकद्दस किताब है। जिसमें दुनिया के तमाम मसाइल का हल मौजूद है। हाफिज गुलाम मुर्तजा व शहाबुद्दीन ने नातिया कलाम पेश किए। दुआ के साथ महफिल संपन्न हुई। इस दौरान हाजी खुर्शीद अनवर, शमीम अहमद तुर्क एडवोकेट, वसीम अहमद तुर्क, फुरकान सैफी, महबूब अहमद आदि मौजूद रहे।