अमरोहा। नगर पालिका परिषद में रसीदों में खेल करके लाखों रुपये का घोटाला करने वाले टैक्स मोहर्रिर (वर्तमान में चपरासी) की गर्दन फंस गई है। नायब तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के आधार पर कमिश्नर ने विधिक और विभागीय कार्रवाई के लिए एडीएम को पत्र लिखा है। अधिकारियों की माने तो अब आरोपी के खिलाफ एफआईआर होगी साथ ही विभागीय कार्रवाई भी। आरोपी वर्तमान में चपरासी के पद पर तैनात है। उससे गौशाला में काम लिया जा रहा है। घोटाले का खुलासा फॉर्म 5 संख्या 3176 और 3044 के सामने आने के बाद हुआ था। एक बुक संख्या और एक ही नंबर की दो-दो रसीदें सामने आई थीं। एक नंबर की दो रसीदों पर अलग-अलग दो कर दाताओं से धनराशि वसूली गई। यह कोई एक-दो रसीदों का खेल नहीं थीं, बल्कि 100-100 पेज की दो रसीद बुकों का गड़बड़झाला था।
यह फर्जीवाड़ा नगर पालिका परिषद अमरोहा से जुड़ा है। जो वर्ष 2021 की शुरूआत में सामने आया। वर्तमान में चपरासी के पद पर तैनात आरोपी ने कर अमीन के पटल पर रहते पालिका की फार्म- पांच और बुक संख्या 3176 और 3044 की फर्जी रसीद बुक छपवा लिया था। जिसके माध्यम से सरकारी लाखों रुपये के का गबन किया। प्रकरण का खुलासा होने पर तत्कालीन जिला अधिकारी अमरोहा के आदेश के क्रम में तत्कालीन एडीएम द्वारा जांच की गई। उनके जांच में गबन का आरोप सिद्ध होना पाया गया। लेकिन, पालिका अधिकारियों द्वारा गबन की पुष्टि हो जाने के बाद भी आरोपी कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई और न उसे कार्य से हटाया गया। तत्कालीन ईओ ने उसके निलंबित कर कुछ दिन बाद भी बहाल कर दिया। इस खेल में विभाग के और भी कई अधिकारी-कर्मचारी शामिल होने की चर्चा है। अधिकारियों ने खानापूर्ति करते हुए केवल कागजों में आरोपी का पदनाम बदल दिया। जबकि लाखों रुपये का गबन करने के मामले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। अफसरों की साठगांठ से आरोपी कर्मचारी चपरासी के पद पर तैनात होने के बावजूद उसी कर अमीन के पटल पर काम कर रहा है, जहां उसने लाखों रुपये का घोटाला किया था। आरोप था कि पालिका द्वारा की गई कार्रवाई को आरोपी कर्मचारी की सेवा पुस्तिका में अंकित नहीं किया गया है। मामले की शिकायत एक भाजपा नेता ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से की तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया था। जिसके बाद शासन के निर्देश पर नौ सितंबर 2021 को तत्कालीन अपर आयुक्त मुरादाबाद राजेंद्र सिंह सैंगर ने तीन सदस्य टीम द्वारा प्रकरण कराकर सात दिन में रिपोर्ट तलब की थी। प्रकरण में जांच तो कराई गई लेकिन बाद में सभी अधिकारी चुप्पी साधकर बैठ गए। करीब छह महीने पहले फिर वर्तमान कमिश्नर ने मामले की जांच कराने के लिए तत्कालीन एडीएम भगवान शरण को पत्र लिखा। इस मामले में एडीएम ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह को जांच सौंपी। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के आदेश पर नायाब तहसीलदार जांच की और अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपी। इस जांच के बाद घोटालेबाज चपरासी की गर्दन फंस गई है। ईओ डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि मामले में कमिश्नर ने आरोपी के खिलाफ विधिक और विभागीय कार्रवाई करने करने के लिए लिखा है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद आरोपी के खिलाफ नियमानुसार विधिक और विभागीय कार्रवाई कराई जाएगी।
ऐसे किया गया था फर्जीवाड़ा
नगर पालिका परिषद अमरोहा में फर्जी रसीदों का खेल कुछ इस तरह हुआ है कि फार्म-5 बुक संख्या 3044 की रसीद संख्या 77 की दो रसीदें काटी गईं। दोनों ही रसीदें अलग-अलग करदाता को दी गई । इसमें एक रसीद वसीम अहमद के नाम पर काटी गई है, जिसमें 600 रुपये वसूले गए। जबकि एक रसीद अहमद अली के नाम पर काटी गई, उनसे गुड़ा-भाग करने कर कुल 7080 रुपये वसूले गए। कुछ ऐसे ही बुक संख्या 3044 की रसीद संख्या 79 में हुआ। इसमें एक रसीद शबीह अख्तर के नाम पर काटी गई, उनसे गुड़ा-भाग कर कुल 7190 रुपये वसूले गए। जबकि इसी नंबर की एक रसीद वसीम अहमद के नाम पर काटी गई, जिनसे कुल 400 रुपये वसूले गए।