अमरोहा। भाजपा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष उदयगिरि गोस्वामी संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं, पूर्व में भी जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। संगठन के लिए बेहतर काम करने की क्षमता भी रखते हैं। लेकिन जिले में अपने ही पदाधिकारियों के बीच चल रही गुटबाजी को संभाल पाना कड़ी चुनौती होगी। जो पदाधिकारी जिलाध्यक्ष दौड़ में थे, उनकी नाराजगी भी संगठन और नवनिर्वाचित जिला अध्यक्ष के लिए मुसीबत बन सकती है। भले ही ये पदाधिकारी संगठन की नजरों में खुद को साबित करते रहें, लेकिन भितरघात की राजनीति कर सकते हैं।
भाजपा ने उदयगिरि गोस्वामी को जिला अध्यक्ष बनाया है। उनके जिला अध्यक्ष बनने के बाद पद की दौड़ में लगे कई नेताओं के अरमानों पर पानी फिर गया। खुद को जिलाध्यक्ष बनाए जाने का दावा करने वाले जाट, चौहान, गुर्जर, सैनी नेताओं मायूसी देखी गई। जिले के माननीयों ने भी अपने चाहने वालों को जिलाध्यक्ष बनने का भरोसा दिला रखा था। लेकिन शुक्रवार को लिस्ट जारी होते ही सभी के मंसूबों पर पानी फिर गया। उदयगिरी गोस्वामी के जिलाध्यक्ष बनने की खबर सभी को चौंका रही है।
वजह, कुछ दिन पहले तक उदयपुर गोस्वामी का नाम दूर-दूर तक सुर्खियों में नहीं था। भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए पूर्व में हाईकमान ने पार्टी के पदाधिकारियों के नाम मांगे। चर्चा थी कि जाट, चौहान, गुर्जर, सैनी, अनुसूचित जाति से करीब 25 से 30 नेताओं के नाम सामने आए। यहीं नहीं दूसरे जिलों के नेताओं ने अमरोहा पहुंचकर समीक्षा भी की थी। इन सबके बीच चार से पांच नेता ही सुर्खियों में रहे। जिसमें चौधरी युद्धवीर सिंह, भूपसिंह, अग्रवाल समाज शरद गर्ग, सतीश अग्रवाल, सैनी बिरादरी से केएस सैनी, चौहान में तिलकराज चौहान शामिल थे। लेकिन, उदयगिरि को छोड़कर सबके अरमान ढेर हो गए। हालांकि शनिवार को नवनिर्वाचित जिलाध्यक्ष का जिलेभर में कई जगह स्वागत हुआ। जबकि तमाम नेता जिलाध्यक्ष के साथ सेल्फी खींचकर फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल करते रहे।