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Amroha News: बारिश से सड़कें जलमग्न, टपकने लगे पक्के घर

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अमरोहा। जिले में बारिश ने बीते छह सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। तीन दिन में करीब 151 मिमी बारिश दर्ज की गई है। लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए आफत बन गई है। सरकारी भवनों में पानी भर गया है। शहर में नाले और गलियाें में पानी भरने के कारण तालाब जैसे हालात बन गए हैं। सड़कें जलमग्न हो गई है। लोगों के पक्के घर भी टपकने लगे है। लोगों को हादसों का भी खतरा बना है। जर्जर भवनों के गिरने का डर सता रहा है।
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बुधवार रात से शुरू हुई बारिश का सिलसिला बृहस्पतिवार के बाद शुक्रवार को भी शाम तक जारी रहा। बारिश से जहां मौसम सुहावना हो गया। वहीं, जगह-जगह जलभराव हो गया। दुकानदार और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश से शहर से लेकर गांव तक की सड़कें जलमग्न हो गईं।
शहर का मुख्य बाजार, कोतवाली, आजाद रोड, कैलसा बाईपास, जामा मस्जिद, नगर पालिका, कोतवाली गेट सहित आदि कई क्षेत्रों में सड़कों पर पानी भर गया। लोग नाले-नालियों को साफ खुद ही पानी निकालने का प्रयास करने लगे। दुकानदार व राहगीरों में पालिका के खिलाफ आक्रोश दिखा। वहीं, दूसरों की परेशानी दूर करने वाली नगर पालिका की छत भी टपकती दिखी। इतना ही नहीं लगातार बारिश के कारण कई मकान और प्रतिष्ठान भी टपकने लगे हैं।
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जिला कृषि अधिकारी बबलू सिंह ने बताया कि पिछले छह सालों में सितंबर में इतनी बारिश नहीं हुई। जितनी तीन दिन में रिकार्ड की गई है। उन्होंने बताया कि 2018 के सितंबर में 147.75 एमएम बारिश हुई थी। जबकि, 2019 सितंबर में भी 147.75 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। 2020 सितंबर में केवल 20.25 एमएम बारिश हुई। 2021 सितंबर में 113.25 एमएम, 2022 सितंबर में 121.87 एमएम और 2023 के सितंबर में 98.75 एमएम बारिश हुई थी। इस साल सितंबर के तीन दिन में बारिश ने पिछले छह सालों का रिकार्ड तोड़ दिया है। बुधवार रात से शुक्रवार तक करीब 151 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी है।
शहर में 48 जर्जर भवन बने हादसे का सबब, जिम्मेदार मौन

अमरोहा। जिले में बुधवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश जारी है। पक्के घर टपकने लगे है। शहर में 48 जर्जर और गिराऊ भवन हैं, जो हादसे का सबक बन रहे हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार गंभीर नहीं है। नगर पालिका की ओर से भी मकान मालिकों को नोटिस जारी कर पल्ला झाड़ लिया है।
नगर पालिका के रिकॉर्ड के मुताबिक अमरोहा के बाजार शफातपोता में पांच भवन जर्जर व गिराऊ है। जबकि, कुरैशी में सात, बाजार रज्जाक में दो, मोहल्ला बंगला में चार, कालां कुआं में तीन, नौबतखाना में दो, नियाजियान में तीन, काली पगड़ी, गश्तियान में दो-दो जर्जर भवन है। इसके अलावा कूंचा खत्रियान, चिल्ला, शकूरपुरा, आवास विकास, लाल मस्जिद, मोहल्ला कोट, शाही चबूतरा, सद्दो, कटरा बख्तावर सिंह, बदावाला, चाहगोरी में भी जर्जर और गिराऊ मकान है। ईओ डॉ. बृजेश सिंह ने बताया कि जर्जर और गिराऊ मकान मालिकों को नोटिस दिए जा चुके हैं। कुछ दिन पहले नगर पालिका ने दो मकानों को ध्वस्त भी कराया था। अगर कोई हादसा होता है तो इसके जिम्मेदार भवन मालिक होंगे। संवाद
छत के मलबे में दबा घरेलू सामान
गजरौला। गांव बिजौरा निवासी जमशेद अली ठेला लगाता है। उसका घर गांव के बाहरी छोर पर खेत के किनारे बना है। घर की छत पर टिन पड़ी थी। बारिश से उनके घर की दीवार और छत में दरार हो गई। वहीं, बृहस्पतिवार रात अचानक मजदूर के घर की छत गिर गई। गनीमत है कि हादसे के समय रिश्तेदारी से फोन आया था। जिस पर सभी घर के आंगन में आ गए थे। वहीं, छत गिरने के कुछ ही देर में दीवार भी गिर गई। मलबे में दबकर मजदूर का घरेलू सामान नष्ट हो गया। शुक्रवार सुबह ग्राम प्रधान नदीम अहमद ने मौके पर पहुंचे और हसनपुर तहसीलदार व पटवारी को मामले की जानकारी दी। कानूनगो कुलवीर सिंह व लेखपाल संजय कुमार ने मुआयना कर नुकसान का जायजा लिया और रिपोर्ट तैयारी की। उधर, नगर के फाजलपुर मोहल्ले में बारिश से कई घरों के पास पानी भर गया। नागरिकों ने नारेबाजी कर जल निकासी की मांग उठाई है। संवाद
मंडी समिति, सीएचसी और ब्लॉक परिसर में भरा पानी
गजरौला। बीते तीन दिन से हो रही बारिश से हर काेई त्रस्त हो गया। जगह-जगह जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश से नगर में बस्ती मार्ग पर गहरा गड्ढा बन गया। जिसमें पानी भर जाने पर दो पहिया वाहन के साथ हादसे का डर रहता है। ब्लॉक परिसर, पशु अस्पताल, मंडी समिति, सीएचसी जलमग्न हो गए। सीएचसी में टीकाकरण कक्ष में पानी भर गया है। रेलवे स्टेशन पर चल रहा पैदल यात्री पुल और अन्य निर्माण कार्य भी बारिश के चलते बंद करना पड़ा। वहीं, बारिश के चलते ग्रामीणों के सामने पशुओं के चारे की व्यवस्था करना भी समस्या बन गई है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अतुल राजपूत का कहना है कि कई दिन से हो रही बारिश पशुओं के लिए अच्छी नहीं है। कई दिन तक भीगते रहने से गोवंशीय पशुओं का दूध कम हो जाता है। इसलिए उनको लगातार भीगने से बचाएं। अन्यथा पशु बीमार हो सकते हैं। संवाद
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