अमरोहा। नगर पालिका परिषद अमरोहा के सीमा विस्तार के साथ वार्डों का नए सिरे से गठन हुआ है। छह नए वार्डों के साथ नगर पालिका में अब 40 वार्ड हो गए हैं। जल्द ही नगर निकाय के चुनाव प्रस्तावित हैं। इसलिए शासन के निर्देश पर नगर पालिका क्षेत्र में ओबीसी रैपिड सर्वे कराया जा रहा है। यह सर्वे 20 अक्तूबर तक चलेगा। इसके बाद ही वार्डों के आरक्षण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पालिका ने सर्वे के लिए प्रत्येक वार्ड में एक कर्मचारी को लगाया है।
अमरोहा नगर पालिका का सीमा विस्तार में 21 ग्राम पंचायतों के 45 गांवों को शामिल किया गया है। इन ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधान और ग्रामीण इसके विरोध में हैं। सीमा विस्तार को रद्द कराने की मांग को लेकर ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों ने दो याचिका दायर की थीं। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों की याचिका को खारिज कर दिया था। जबकि ग्रामीणों की तरफ से दायर की गई याचिका पर अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी है।
जबकि अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन ने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस बीच सीमा विस्तार के विरोध में चौदह आपत्तियां दर्ज की गई थीं। जिनका निस्तारण कर प्रशासन ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है। इधर प्रशासन ने नगर पालिका के वार्डों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने के लिए रैपिड सर्वे शुरू करा दिया है। ईओ बृजेश सिंह ने बताया कि सर्वे चल रहा है। यह सर्वे 20 अक्तूबर तक पूरा करना होगा। इस सर्वे के बाद ही वार्डों के आरक्षण की स्थिति साफ हो सकेगी।
ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों की यह है आपत्ति
अमरोहा। ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों की आपत्ति है कि ग्राम पंचायत प्रधान संवैधानिक रूप से पांच वर्ष के लिए निर्वाचित हुए हैं। लेकिन प्रदेश सरकार द्वारा उनमें से कुछ ग्राम पंचायतों का विलय नगर पंचायतों में करके वहां के निर्वाचित प्रधानों को अपदस्थ किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों का नगर पंचायतों में विलय राज्यपाल के द्वारा आपत्ति प्राप्त कर उसके निस्तारण के बाद ही किया जा सकता है। लेकिन मौजूदा राज्य सरकार ने बिना आपत्ति प्राप्ति व निस्तारण के ग्राम पंचायतों का विलय नगर पंचायतों में कर दिया है, जो पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। विलय बिना आम सहमति के नहीं किया जा सकता।
ग्राम पंचायतें अपना विलय नगर पंचायतों में नहीं चाहती हैं। कहा कि ग्राम पंचायतों की 90 फीसदी भूमि कृषि योग्य भूमि है। वहां की नब्बे प्रतिशत जनसंख्या व्यापार नहीं करती है। जिसके कारण नगर पंचायतों में शामिल की गईं ग्राम पंचायतों का विलय विधि विरुद्ध है। उधर, अब अखिल भारतीय प्रधान संगठन ने एक ओर याचिका दायर की है। उधर, नगर पालिका की ओर से गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना शहर के तहत 700 लाभार्थियों को चिह्नित किया है। उनके प्रपत्रों की जांच चल रही है।