अमरोहा। इमाम हुसैन अलै. के जन्मदिवस के उपलक्ष में दुर्वेश फाउंडेशन के तत्वावधान में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें इमाम हुसैन की शान में कलाम पेश कर अपनी अकीदत का इजहार किया।
नगर के मोहल्ला बड़ा बाजार स्थित एक धर्मशाला में मुशायरे की शुरूआत तिलावते कलामे पाक से मास्टर इरफान बाकरी और नाते नबी से मोहम्मद अली इब्ने ताजदार ने की। भुवनेश कुमार शर्मा ने यूं पढ़ा...नाम आया था जुबां पर सरजमीने हिन्द का, जान हिन्दू क्यों न दें इब्ने अली पर शान से, सोचता हूं ऐ भुवन इस से अयां ये राज है, उनको खुशबू-ए-वफा आई थी हिन्दुस्तान से। सतेंद्र धारीवाल ने ऐसे पढ़ा...आती हैं याद कितना वो यादें हुसैन की, इंसान को ईमान की बातें हुसैन की, नामंजूर थी बैअत शहादत कुबूल थी, धारी के दिल में बस गईं बातें हुसैन की। हुमायुं हैदर ने इस तरह पढ़ा...मातमे हजरते शब्बीर से ये फैज मिला, हम गाजी के वफादार कहे जाते हैं। ताजदार अमरोहवी ने कहा...कहा ये दीन-ए-मोहम्मद ने बाद ऐ करब-ओ-बला, दर-ए-हुसैन से पलटा हूं जिंदगी लेकर। सैयद शीबान कादरी ने यू कहा...ये रात और जल्वा नुमाई हुसैन की, सीनों में रोशनी उतर आई हुसैन की। कैसर मुजतबा ने ऐसे कहा...हैं यहां सब फातहे बद्र, हुनैन व कर्बला, मुस्तफा के समधियाने की अलग ही बात है।
इनके अलावा जिया काजमी, सिकंदर अमरोहवी, डॉ. नासिर अमरोहवी आदि ने भी अपने कलाम पेश किए। अध्यक्षता शमशुल हुसैन एवं संचालन मूसी अमरोहवी व ताजदार अमरोहवी ने संयुक्त रूप से किया। कन्वीनर भुवनेश कुमार शर्मा ने सभी का आभार जताया। इस दौरान महेंद्र कुमार, नौशा अमरोहवी, सिराज नकवी, इकबाल हैदर व डॉ. सफी आदि मौजूद रहे।