बुधवार रात से शुरू हुई बारिश से शनिवार सुबह राहत मिली। लेकिन, बदले मौसम में जगह-जगह हुए जलभराव से बीमारियों को खतरा बढ़ गया है। बारिश होने के कारण घरों में कई स्थानों पर पानी इकट्ठा हो जाता है। इसके अलावा कूलर व फ्रिज की ट्रे में भी पानी भरा रहता है। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि बारिश का पानी छत पर पड़े पुराने टायर और मिट्टी के टूटे बर्तनों में भरा रहता है। इससे मलेरिया व डेंगू का मच्छर पैदा होने की आशंका रहती है। मच्छर पनपने के लिए ये स्थिति मुफीद होती है। इस वजह से इस मौसम में मलेरिया और डेंगू होने का खतरा रहता है। उधर, रविवार को जिला अस्पताल के वार्ड में बुखार के 13 मरीज भर्ती रहे। वहीं, जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में दो मरीज भर्ती हैं। जिले में अभी तक तीन लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। जबकि, आशंकित मरीजों की लगातार जांच की जा रही है।
खाली प्लॉट बने मच्छरों का अड्डा
शहर में खाली पड़े प्लॉट मच्छरों का अड्डा बन गए हैं। लोगों ने बड़ी संख्या में प्लॉट तो खरीद रखे हैं, लेकिन इनमें कोई निर्माण नहीं कर रखा। चहारदीवारी करके बाहर गेट लगाकर इन्हें ऐसे ही छोड़ रखा है। जब बारिश होती है तो इन्हीं प्लाॅटों में पानी भर जाता है। डेंगू व मलेरिया फैलाने वाले मच्छर इनमें अंडे देते है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को यह भी नहीं पता कि यह प्लाॅट किसके हैं, ताकि इन प्लॉटों में काला तेल या दवा का छिड़काव किया जा सके।
क्या करें, क्या न करें
-घरों को साफ सुथरा रखें।
-कूलर की टंकी का पानी निकाल कर साफ करें।
-एसी का ढ़क्कन खोलकर साफ करा दें।
-फ्रिज की नियमित खाने वाले सोडा से सफाई करें।
-गंदे पानी के निकास में हर दूसरे दिन फिनाइल का प्रयोग करें।
-घर के आसपास पानी न भरा रहने दें।
-नालियों में जला हुआ मोबिल ऑयल दो ढक्कन नियमित डालें।
-बुखार आने पर तत्काल सरकारी लैब में जांच कराएं।
-पीने के पानी में क्लोरीन मिलाकर ही पियें।
- गमलों में भी पानी न भरा रहने दें।
डेंगू के लक्षण
- तेज बुखार
- शरीर में तेज दर्द
- उल्टियां
- शरीर पर चकत्ते
- कमजोरी