अमरोहा। पुलिस ऑनलाइन हो चुकी है। थाने में कंप्यूटर पर केस दर्ज होता है, एफआईआर ऑनलाइन अपलोड होती है, ताकि कोई भी उसे निकाल सकें। सोशल मीडिया पर पुलिस हरदम सक्रिय रहती है। कई लोग ऑनलाइन केस दर्ज कराते हैं। पुलिस के काम करने का नजरिया काफी बदला है। लेकिन आज भी अगर कुछ नहीं बदला है तो पुलिसिया टोटका। टोटके के डर की वजह से आज भी पुलिस नए साल के पहले दिन पहला केस केवल गुडवर्क को ही जीडी दर्ज करती है। पिछले कई साल के आंकड़े तो यही गवाही दे रहे हैं।
इसके पीछे पुलिस का यह डर है कि अगर थाने का पहला केस कोई घटना दर्ज करेंगे तो पूरे साल ऐसी घटनाओं की बाढ़ आ जाएगी। इसी डर से साल दर साल बीतते जा रहे हैं, लेकिन पुलिस का टोटका बरकरार है। इस साल भी पुलिस ने जिले के बारह थानों में से अमरोहा देहात, अमरोहा नगर, बछरायूं, गजरौला, हसनपुर, मंडी धनौरा, नौगांवा सादात में गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा सैदनगली, आदमपुर, डिडौली, रहरा और रजबपुर में आबकारी अधिनियम (दफा-60) में केस दर्ज किया है। पुलिस ने गुड वर्क के नाम पर कई लोगों की गिरफ्तारी भी दिखाई है। वहीं, पुलिस के गुडवर्क के फर्द पर नजर डालें तो वह भी अंग्रेजों के जमाने का है। उसी प्रारूप पर आज भी गुडवर्क के मुकदमों के फर्द (फौजदारी के विभाग में वह कागज जिसपर अपराधी के दंड का विवरण होता है) लिखे जाते हैं।
क्यों अपनाते हैं टोटके, क्या है फायदा
थाना परिसर में एक मंदिर की स्थापना भी रहती है। मंदिर छोटा या बड़ा हो सकता है, लेकिन बिना पूजा पाठ किए पुलिस कर्मचारी कामकाज नहीं शुरू करते। पुलिस से जुड़े लोगों का कहना है कि थानों का कामकाज ऑनलाइन हो गया है। फिर भी यहां पर टोटके चल रहे हैं। थानों पर रोजाना के कार्यकलाप की एंट्री जनरल डायरी में होती है। थाने पर कब-कब, क्या-क्या हुआ है। इसकी एंट्री की जाती है।