अमरोहा। हसनपुर में डीसीएम लूट के पीड़ित शब्बीर के संघर्षों की कहानी काफी लंबी है। लूट के मामले को दबाने में दो सीओ, तीन इंस्पेक्टर समेत आठ पुलिसकर्मियों व अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने में आर्थिक तंगी से लेकर उत्पीड़न तक सहन करना पड़ा। करीब नौ साल तक न्याय के लिए दौड़ते रहे। कई तरह की पीड़ा झेलने के बाद भी उन्होंने न्याय की आस नहीं छोड़ी लेकिन उनकी मेहनत पर पानी फेरने में मौजूदा अधिकारियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। स्थिति ये रही कि पुलिस वालों के खिलाफ 345 दिन पहले 13 अप्रैल 2022 को न्यायालय ने मुकदमे के आदेश किए थे। पुलिस अफसरों के साथ आरोपियों में उस समय सपा सरकार के मंत्री का एक आरोपी भी शामिल था, इसलिए अफसर न्यायालय के आदेश को दबाकर कर बैठे रहे। इस बीच कई अधिकारी और थानेदार बदले लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई।
अब मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पीड़ित शब्बीर को अभी भी पुलिस पर नहीं भगवान पर भरोसा है। उनका कहना है कि उन्होंने फाइनेंस पर 16 लाख रुपये में डीसीएम को खरीदा था। जिसमें कंपनी का ब्याज भी शामिल हैं लेकिन जब किस्त जमा नहीं कर पाए तो कंपनी ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। हालात ये बन गए कि शब्बीर कंपनी का मुकदमा भी झेल रहे हैं। साथ ही वर्ष 2014 से अपने साथ हुई घटना में न्याय मिलने की उम्मीद में संघर्ष करते रहे। उन्हें संघर्षों में लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
दो बार खारिज हुई अर्जी, तीसरी बार में मुकदमे के आदेश
पीड़ित शब्बीर को मुकदमा दर्ज कराने के लिए भी मुसीबतों का सामना करना। पुलिस द्वारा न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुए मुकदमे में एफआर लगाने के बाद वर्ष 2017 में 156 (3) के तहत मुकदमा दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र दायर किया था लेकिन पीड़ित शब्बीर समय पर न्यायालय उपस्थित नहीं हो सके। लिहाजा न्यायालय ने उनके अर्जी को 11 जुलाई 2017 को खारिज कर दिया था। यही स्थिति उनके साथ दोबारा में हुई। उन्होंने दोबारा से फिर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां प्रार्थना पत्र दायर किया। इस बार भी शब्बीर न्यायालय में पेश नहीं हो सके। जिस पर न्यायालय ने ये कहते हुए शारित कर दिया कि ऐसा प्रतीत होता है कि उसकी प्रार्थना पत्र के निस्तारण में कोई अभिरुचि नहीं है। इसलिए प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाता है। दो बार प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद शब्बीर ने तीसरी बार फिर न्यायालय की शरण ली। जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 13 अप्रैल 2022 को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
मुकदमा दर्ज हुआ तो बनाने लगे दबाव
अमरोहा। पीड़ित शब्बीर ने फोन पर बातचीत के दौरान बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी पुलिसकर्मी इधर-उधर से फैसले का दबाव बनाने लगे हैं। इतना ही नहीं जिस समय के साथ घटना हुई थी उस समय सपा की सरकार थी। लूट के आरोपी एक मंत्री के करीबी थे। जिसकी वजह से पुलिस ने भी लूट के आरोपियों का साथ दिया था।
तीन बेटों की मजदूरी से चलता है घर
आदमपुर निवासी शब्बीर के परिवार में पत्नी के अलावा चार बच्चे हैं। उनकी बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है जबकि तीन बेटे कुंवारे हैं। अब तीनों बेटे मेहनत मजदूरी करते हैं। जिससे परिवार का पालन पोषण हो रहा है।
न्यायालय ने तलब की रिपोर्ट तो दर्ज किया मुकदमा
लूटने के पुलिस की ज्यादती का शिकार हुए शब्बीर ने बताया कि 13 अप्रैल 2022 को न्यायालय में मुकदमे के आदेश कर दिए थे। लेकिन पुलिस के द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद में कई बार उच्च अधिकारियों से मिला लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा उसने फिर से न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखी। जिसके बाद न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट तलब की तो आनन-फानन में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने अपनी गर्दन फंसने से बचा ली।
ये है पूरा प्रकरण
आदमपुर निवासी शब्बीर के मुताबिक एक अप्रैल 2014 की रात करीब 11 बजे मनौटा पुल पर कार सवार चार बदमाशों ने उनकी गाड़ी (डीसीएम) लूट ली थी। वह गाड़ी में सवार थे। बदमाश उनसे दो हजार रुपये भी झपट ले गए थे। आरोप है कि बदमाशों से मिलीभगत के कारण हसनपुर कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर रामपाल भाटी ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इस पर शब्बीर ने अदालत की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज किया लेकिन तत्कालीन विवेचक सब इंस्पेक्टर आरके यादव ने मामले में एफआर लगा दी। कुछ समय बाद तत्कालीन इंस्पेक्टर इंद्रमणि वर्मा व दरोगा विजय सिंह राणा ने लूटी गई गाड़ी बरामद कर ली।
इसके बाद भी गाड़ी मालिक शब्बीर को जानकारी नहीं दी, न ही केस दर्ज किया। लूट पर परदा डालने के लिए गाड़ी लावारिस गाड़ी दर्शाकर नीलाम कर दी। शब्बीर का कहना है कि सीओ से लेकर एसपी तक शिकायत की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद शब्बीर ने फिर अदालत का रुख किया। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने 13 अप्रैल 2022 को दिए आदेश पर पुलिस ने अब तत्कालीन सीओ जितेंद्र सिंह, तत्कालीन सीओ सोमेंद्र नेगी, तत्कालीन इंस्पेक्टर रामपाल भाटी, तत्कालीन इंस्पेक्टर इंद्रमणि वर्मा, तत्कालीन इंस्पेक्टर अनिल समानिया, एसआई आरके यादव, एसआई विजय सिंह राणा, हेड मोहर्रिर सुनील कुमार के अलावा डीसीएम लूटने के आरोप में सैदनगली थाना क्षेत्र में उझारी निवासी वसीम, मारूफ, भूरा मिस्त्री और थाना सैदनगली में फत्तेहपुर मिलक निवासी असलम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है।