गजरौला (अमरोहा)। पिता से पैसों को लेकर हुए विवाद के बाद पत्नी को कार में बैठाकर गंगा में कूदे शाने आलम का शव तो बरामद हो गया, लेकिन 48 घंटे के बाद भी उसकी पत्नी नाजिया और कार का पता नहीं चल सका है। पुलिस, गोताखोर और परिजन लगातार नाजिया की गंगा में तलाश कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को थाना क्षेत्र के गांव सीकरी खादर निवासी शाने आलम का उसके पिता साबिर और मां रूना से विवाद हो गया था। जिसके बाद गुस्से में शाने आलम कार में पत्नी नाजिया को बैठाकर पिता, मां और बहन को टक्कर मारने के बाद घर से निकलकर कार को लेकर गंगा में कूद गया था। शुक्रवार की सुबह शाने आलम का शव बरामद हो गया था। मगर उसकी पत्नी और कार का अभी तक पता नहीं चल सका है। उसे शुक्रवार की शाम तक स्थानीय गोताखोर और ग्रामीण गंगा में खोजते रहे। शनिवार की सुबह गोताखोर और आस पास के तैराक ग्रामीण नाजिया व कार को तलाश करने के लिए गंगा में उतर गए। नाविक पांच-पांच किलो की चुंबक को पानी की सतह में घुमा रहे हैं। इसके अलावा दस कुशल तैराक ट्यूब से घटना स्थल से लेकर तिगरी तक घूमते रहे। पीएसी और पुलिस टीम ने भी अपनी मोटर बोट से गंगा को खंगाला। उप निरीक्षक रामेंद्र सिंह के नेतृत्व में थाना पुलिस टीम लगातार गंगा में सर्च कर रही है। लोहे के भारी कांटे से भी टीम गंगा में नाजिया व कार को तलाश कर रही हैं, मगर 48 घंटे बाद भी न तो उसका सुराग मिला और न ही कार बरामद हो सकी। पुलिस ने बताया कि अभी तक सफलता हाथ नहीं लगी है।
घायल पिता को संभाल कर बेटे के दफीने में ले गए ग्रामीण
शुक्रवार की सुबह शाने आलम का शव बरामद होने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। शाम को पोस्टमार्टम के बाद गांव में लाया गया। उधर निजी अस्पताल में जिंदगी मौत के बीच झूल रहे साबिर को बेटे के दफीने में शामिल होने के लिए मेरठ से गांव में लाया गया। मगर उनकी हालत ऐसी नहीं थी कि वह खड़े होकर दफीने में शामिल हो सके। ग्रामीण संभाल कर कब्रिस्तान तक ले गए। घायल होने के साथ ही बेटे और बहू के गम में इस कदर टूट गए थे कि उनकी जुबां से शब्द नहीं निकल रहे थे। वह गमजदा हो गए। शाने आलम की मां रूना व बहन मंतशा की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
मामी के घर जाने की जिद कर रही थी नाजिया
गंगा में डूबने से पहले शाने आलम और उसकी पत्नी नाजिया का शाने आलम की मां रूना से भी विवाद हुआ था। ग्रामीणों का कहना है कि नाजिया की नौगावां सादात के मिट्ठेपुर कलां में ननिहाल है। उसकी मामी का स्वास्थ्य सही नहीं है। वह शौहर से अपनी मामी की राजी खुशी लेने के लिए मिट्ठेपुर चलने का दबाव बना रही थी। वह तैयार भी हो गया था। मगर उसकी मां रूना ने शाम हो जाने के कारण जाने का विरोध किया। मृतक की बहन और छोटा भाई भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि उनकी भाभी अपनी मामी को देखने के लिए जाने की जिद कर रही थी। उधर मां-बेटे और बहू के बीच हो रहे विवाद की जानकारी होने पर पिता साबिर भी पहुंच गए। वह पड़ोस में बैठे थे। मां से झगड़ कर कार लेकर पत्नी संग निकल रहे शाने आलम को पिता ने समझाने की कोशिश की। वह कार के आगे खड़े हो गए। मगर उसके सिर पर शैतान सवार था। वह पिता को काफी दूर तक रौंदते ले गया।