कुम्हरिया के रहने वाले अरुण कुमार ने मनरेगा कार्यों में गबड़ी को लेकर मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। आरोप है कि मनरेगा कार्य में जांच में 58289 रुपये की धनराशी का दुरुप्रयोग किया गया है। जिसमें जांच में ग्राम प्रधान , सचिव, रोजगार सेवक और ब्लाक के तकनीकी सहायक दोषी पाए गए थे। शिकायत कर्ता का कहना है कि जांच को पुन कराकर सबूतों को मिटने की कोशिश की गई है। वहीं मामले में मंडल आयुक्त ने भी पुन जांच कराने के संबंध में जवाब मांगा है।
अमरोहा ब्लाक के कुम्हरिया ग्राम पंचायत के गांव कुम्हरिया के रहने वाले अरुण कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र सौंपकर गांव में मनरेगा कार्यों में हुई गड़बड़ी की जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अरुण का आरोप है कि उसने ग्राम पंचायत में मनरेगा के अर्न्तर्गत कराए गए चार कार्यों में अनियमितता की शिकायत की थी। जिसमें जांच के बाद 58297 रुपये की धनराशि का दुरुपयोग सामने आया था। जिसके लिए ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, टीए एव रोजगार सेवक दोषी पाए गए थे। लेकिन आरोप है कि दोषियों द्वारा खुद को बचाने के लिए फर्जी प्रार्थना पत्र देकर जांच के लिए जिला विकास अधिकारी एवं सहायक अभियंता ग्रामीण विकास विभाग को नामित किया गया लेकिन आरोपियों ने चारो कार्यों की एमबी को बदलकर प्रार्थी की अनुपस्थिति में दूसरी जांच कराई। जिसके बाद शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम जांच व दूसरी जांच में लगी एमबी बदलने की शिकायत मुख्य विकाश अधिकारी से शिकायत की थी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
जिसके बाद बृहस्पतिवार को फिर से एक बार प्रार्थी ने सुनवाई के लिए मुख्य विकास अधिकारी व मंडल आयुक्त को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इससे पहले भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर देहात थाना पुलिस ने कुम्हरिया के ग्राम प्रधान, सचिव, रोजगार सेवक और ब्लाक के तकनीकी सहायक के खिलाफ धोखाधड़ी समेत की धाराओँ में रिपोर्ट दर्ज की थी। शभी पर भूमिहीनों के खेतों में मेड़बंदी के नाम पर सरकारी धनराशि को गबन करने का आरोप है। वहीं इस पूरे मामले में मंडल आयुक्त की ओर से जवाब तलब मांगा गया है। कहा गया है कि जब एक बार की जांच में आरोपियों को दोषी पाया गया था तो फिर इस जांच को पुन कराने का कोई औचित्य नहीं बनता है।