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Amroha News: ट्रैक न कोर्ट... कैसे चमके खेलों के सितारे

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अमरोहा। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए जिले में स्टेडियम का निर्माण तो हुआ, लेकिन वर्षों बाद भी खिलाड़ियों को सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं। स्टेडियम अभी पवेलियन और क्रीड़ा अधिकारी का आवास ही बन सका है। जबकि, बैडमिंटन, वाॅलीबाल कोर्ट, दौड़ के लिए ट्रैक अभी तैयार नहीं हो सका। हालांकि, कोच यहां तीन खेलों के कोच की तैनाती हो चुकी है, लेकिन सुविधा के अभाव में खिलाड़ी नहीं पहुंच रहे हैं।
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फरवरी 2023 में यह स्टेडियम क्रीड़ा विभाग के सुपुर्द कर दिया गया था। उम्मीद थी कि जल्द ही यहां खिलाड़ियों को बेहतर सुविधा मिलेंगी। उन्हें अभ्यास करने का मौका मिलेगा। लेकिन, उनकी उम्मीदें सुविधाओं के इंतजार में दब गई हैं। कहने को यहां कुश्ती, हॉकी व एथलेटिक्स कोच की तैनाती है, लेकिन सुविधाओं का अभाव उन पर भारी पड़ रहा है। स्थिति यह है कि स्टेडियम में क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, लॉन टेनिस, बॉक्सिंग रिंग, कुश्ती, एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को तराशने का दावा किया जा रहा है। लेकिन स्टेडियम में केवल क्रिकेट की पिच तैयार करने पर ध्यान दिया जा रहा है। जबकि अन्य खेलों को लेकर अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। ऐसा नहीं है कि जिले में क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में दिलचस्पी रखने वाले युवा नहीं है, जिले के कई खिलाड़ियों ने देश दुनिया में अमरोहा का नाम रोशन किया है। लेकिन जिले के स्टेडियम में सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें दूसरे राज्य या जिले में जाकर तैयारी करनी पड़ती है।
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जिले के खिलाड़ियों को क्रिकेट के अलावा एथलेटिक्स व अन्य खेलों में भी सुविधा मिलनी चाहिए। तमाम खेलों में करियर की चाहत रखने वाले युवा सुविधाओं के अभाव का दंश झेल रहे हैं। जल्द ही इन खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम में कोच और बेहतर सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए।-शोएब, एथलेटिक्स खिलाड़ी
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पिछले चार सालों से स्टेडियम में कार्य चल रहा है। लेकिन अभी तक स्टेडियम में कोई सुविधा नहीं मिल रही है। तमाम युवा सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं, निजी एकेडमी में जाकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। अगर जिले के स्टेडियम में बेहतर सुविधाएं मिले तो खिलाड़ियों को बहुत कुछ करने और सीखने का मौका मिलेगा।-सोनू सिंह, खेल प्रेमी
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स्पोर्ट्स स्टेडियम में कई तरह के खेलों की तैयारी करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन सब कुछ कागजों में चल रहा है। हकीकत में स्टेडियम में न तो कोच है और न खिलाड़ियों की तैयारी करने के लिए कोई मुकम्मल व्यवस्था। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए। स्टेडियम में बॉक्सिंग के लिए भी मुकम्मल व्यवस्था होनी चाहिए।- निर्भय विश्नोई, बॉक्सिंग कोच

तमाम युवाओं ने खेल की दुनिया में जिले का नाम रोशन किया है। क्रिकेट ही नहीं एथलेटिक्स व अन्य खेलों में भी जिले के युवा अपना करियर तलाश रहे हैं। अगर उन्हें जरूरत है तो अच्छे स्टेडियम और सुविधाओं की। स्टेडियम में कबड्डी के कोच होना चाहिए। जिससे बच्चों को तैयारी कराई जा सके। - पुरुजीत सिंह, जिलाध्यक्ष क्रीड़ा भारती
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