कानपुर में तैनात तहसीलदार रणविजय सिंह के छोटे भाई रतन प्रताप सिंह की अमरोहा में हत्या कर दी गई। उनका शव डिडौली कोतवाली क्षेत्र के जंगल में लौकी के खेत में पड़ा मिला। सिर पर चोट के निशान मिले। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल की और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बरेली जनपद के नवाबगंज थानाक्षेत्र के गांव हरदुआ किफायतुल्ला में राम स्वरूप सिंह के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटे हैं। बड़े बेटे रणविजय सिंह कानपुर में तहसीलदार हैं। जबकि सबसे छोटा बेटा राकेश सिंह अमरोहा में लेखपाल हैं। दूसरे नंबर का बेटा रतन प्रताप सिंह (38) सीएल गुप्ता फैक्टरी में नौकरी करते थे। इसलिए रतन प्रताप सिंह अपनी पत्नी रेखा और दो बच्चों के साथ डिडौली में किराये के मकान में रहते थे। रविवार सुबह रतन प्रताप सिंह ड्यूटी करने के लिए फैक्टरी गए थे लेकिन वह वापस नहीं आए। सोमवार सुबह रतन प्रताप सिंह का शव डिडौली कोतवाली क्षेत्र के पतेई-ढकिया गांव के जंगल में दरोगा विजेंद्र सिंह के लौकी के खेत में पड़ा मिला।
दरोगा विजेंद्र सिंह के बटाईदार सोमपाल ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर पीके चौहान फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। सीओ सिटी विजय कुमार राणा ने भी घटनास्थल का मुआयना किया। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट की टीम ने मौके पर सबूत जुटाए। रतन प्रताप सिंह के सिर पर चोट के निशान मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि सिर पर किसी चीज से वार करके उनकी हत्या की गई है। रतन प्रताप सिंह की हत्या की सूचना मिलते ही उनके अन्य परिजन भी मौके पर पहुंच गए। सीओ विजय कुमार राणा ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। उनके फोन की कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। जिसके आधार पर यह पता लग सकेगा कि आखिरी बार उनकी किस से बात हुई थी और लोकेशन कहां थी।