जिले में अभी तक मंकी पाॅक्स का कोई भी केस सामने नहीं आया है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। पिछले 21 दिन में विदेश से लौटे लोगों की जांच कराई जाएगी, जिसके लिए टीमें गठित की गई है। सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि किसी व्यक्ति में मंकी पॉक्स के लक्षण पाने पर उसकी जांच किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी लखनऊ की माइक्रोबायोलॉजी लैब से कराई जाएगी। इसके लिए आठ विशेष टीमें गठित की गई है, जो सैंपल कलेक्शन और जांच के कार्यों को संभालेगी। यदि जनपद में मंकी पॉक्स से संक्रमित कोई व्यक्ति मिलता है, तो उसके संपर्क में आए लोगों की सूची तैयार की जाएगी। इसे जिला और राज्यस्तरीय सर्विलांस इकाइयों को उपलब्ध कराया जाएगा।
विदेश से आने वाले व्यक्तियों की तत्काल जांच की जाएगी। सीएमओ ने बताया कि यह एक दुर्लभ बीमारी है, जो वायरस के कारण होती है। इससे चकत्ते और फ्लू जैसे लक्षण होते हैं। इसके लक्षण सामान्यत दो से चार सप्ताह के अंदर प्रदर्शित होते हैं, लेकिन कुछ रोगी गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं। इस बीमारी में मृत्यु दर एक से 10 प्रतिशत तक हो सकती है। यह बीमारी मरीज के संपर्क में आने से फैलती है, इसलिए दूसरे जिलों से आने वाले लोगों पर भी नजर रखने को कहा गया है।
मंकी पॉक्स के प्रमुख लक्षण
इस रोग में शरीर पर दाने, बुखार और लसिका ग्रंथियों में सूजन मंकी पॉक्स के मुख्य प्रारंभिक लक्षण हैं। मनुष्यों में यह रोग पशुओं या अन्य संक्रमित मनुष्यों से फैल सकता है। इस रोग का वायरस ब्रोकन स्किन श्वसन पथ या आंख, नाक, या मुंह के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकता है। मंकी पॉक्स से संक्रमित व्यक्ति द्वारा छुए गए कपड़ों, बिस्तर, तौलिए, वस्तुओं पर वायरस कुछ समय तक बना रह सकता है।
मरीज के संपर्क में आने वालों की होगी निगरानी
अगर किसी में मंकी पॉक्स की पुष्टि होती है, तो कोरोना वायरस की तर्ज पर अन्य गतिविधियां चलाई जाएंगी। रोगी के संपर्क में आने वाले व्यक्तियों की सूची तैयार कर उसे जिला और राज्य स्तरीय सर्विलांस इकाइयों को उपलब्ध कराई जाएगी।
- मंकी पॉक्स को लेकर विभाग पूरी तरह अलर्ट है। एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। सभी सीएचसी व पीएचसी अधीक्षकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी व्यक्ति में यह लक्षण मिले तो उसे होम आइसोलेट कर दें। जिससे कोई अन्य संपर्क में न आए।
- डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ