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Amroha News: झाड़फूंक में जा रही जान, एंटी स्नेक वेनम से अनजान

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अमरोहा। बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ी हैं। लेकिन, अज्ञानता और अंधविश्वास लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। सर्पदंश का इलाज झाड़-फूंक नहीं, बल्कि एंटी स्नेक वेनम है। पिछले कुछ समय में हसनपुर व गजरौला क्षेत्र में सर्पदंश के छह मामले ऐसे हुए हैं, जिनकी जान झाड़-फूंक कराने में चली गई। यदि समय से लोग अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम लगवा लेते तो शायद उनकी जान बच सकती थी। स्वास्थ्य विभाग भी इसे लेकर अलर्ट है। जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी पर एंटी वेनम की भरपूर उपलब्धता है।
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सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि अक्सर देखा जाता है कि सांप के काटने के बाद लोग अस्पताल आने के बजाए झाड़ फूंक करने वालों के चक्कर में फंस जाते हैं। फायदा नहीं होने पर मरीज को लेकर अंतिम समय में अस्पताल पहुंचते हैं तब तक उसकी मौत हो जाती है। बताया कि सांप के काटने पर तुरंत ही सीएचसी या जिला अस्पताल में मरीज को लेकर आएं, ताकि एंटी वेनम लग सके। समय से उपचार शुरू मिलने पर मरीज की जान बच सकती है।
बताया कि जिले में 100 से एंटी वेनम उपलब्ध हैं। जून माह में 10 लोगों को यह डोज लगी। जिसके बाद उनकी जान बच गई। जिले की हसनपुर, गजरौला, मंडी धनौरा, नौगांवा, ढबारसी समेत सभी सीएचसी में एंटी वेनम की उपलब्धता है। बताया 50 फीसदी सांपों में जहर नहीं होता है। कोबरा और करैत प्रजाति के सांपों में अधिक जहर होता है। यदि इनके काटे मरीज समय से अस्पताल पहुंचकर एंटी वेनम लगवाते हैं, तो उनकी जान बच जाती है।
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सांप के काटने पर ये बरतें सावधानी

- सांप काटने पर घबराए नहीं। इससे दिल का दौरा पड़ने की आशंका रहती है।
- जिस अंग पर सांप काटे, उसे चलाएं-फिराएं नहीं, बल्कि स्थिर कर दें।
- वहां पर चीरा भी न लगाएं, घरेलू नुस्खे नुकसानदायक हो सकते हैं।
- अस्पताल पहुंचकर एंटी स्नेक वेनम लगवाएं।
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48 घंटे निगरानी में रखा जाता है सर्पदंश का मरीज
सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि अस्पताल में आने पर सांप काटे के मरीज ब्लड की जांच होती है। कई बार लोग बंध लगा देते हैं, उसे तुरंत खुलवाया जाता है। इसके बाद ब्लडप्रेशर की जांच की जाती है। मरीज को लगाए जाने वाली ड्रिप में दो एंटी स्नेक वेनम वॉयल डाली जाती हैं। साथ ही 48 घंटे चिकित्सक की निगरानी में रखा जाता है।
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इन लोगों की जा चुकी है जान
-छह अप्रैल को गांव हाजीपुर तरारा में 40 वर्षीय किसान शीशपाल सिंह को फसल की सिंचाई के सांप ने डस लिया था। उन्हें झाड़ फूंक कराने वालों के पास ले गए। अस्पताल न ले जाने पर किसान की मौत हो गई।
-एक जुलाई को गांव शीतला सराय निवासी किसान हेम सिंह के बेटे सुमित को कपड़े पहनते समय सांप ने दो बार डसा था। झाडफूंक के चक्कर में उसकी मौत हो गई थी।

- छह जुलाई को रहरा थाना पोरारा की सैनियों वाली मढैया निवासी चालीस वर्षीय सुरेश पुत्र शीलचंद को सांप ने काट लिया था। झाड़फूक के चक्कर में उसकी मौत हो गई थी।

-11 जून को रहरा थाना क्षेत्र के गाव वीरामपुर में 45 वर्षीय संतोष शर्मा के पैर में सांप ने घर के आंगन में काट लिया था। जिससे उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने झाड़फूंक का सहारा लिया था।
- 14 जुलाई की रात गजरौला के मोहल्ला अतरपुरा निवासी कक्षा नौ के छात्र अरुण सैनी 13 को करैथ प्रजाति के सांप ने डसा था। एंटी वेनम डोज न लगवाने पर उसकी जान चली गई।

डोज लगवाने पर बची जान
करीब एक माह पहले आदमपुर क्षेत्र के गांव भूवरा निवासी मुन्नी को सांप ने डसा था। जिसके बाद परिजन महिला को सीएचसी लेकर पहुंचे थे। जिसके बाद एंटी स्नेक वेनम लगवाई। इससे उसकी जान बच गई। अब वह ठीक है।

सांप के काटने के बाद यदि व्यक्ति की मौत होती है। इसके बाद मृत शरीर का पोस्टमार्टम कराया जाता है। सर्पदंश की पुष्टि होने पर परिवार को चार लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सबसे पहले लेखपाल- कानूनगो व तहसीलदार को सौंपी जाएगी। इसके बाद जिलाधिकारी तक इस रिपोर्ट को पहुंचाया जाएगा। उसके बाद जिलाधिकारी की ओर से आपदा राहत कोष से मृतक के परिवार को 4 लाख मुआवजा दिया जाता है। अभी तक जिले में इस तरह का कोई आवेदन नहीं हुआ है।
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-सुरेंद्र सिंह, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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