घटना आठ मार्च 2016 को मंडी धनौरा थाना क्षेत्र के गांव देहरा खादर बख्श में हुई थी। यहां पर मजदूर सुमेर का परिवार रहता है। सुमेर ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करता था। सुमेर ने घर के सामने कुछ जमीन वर्ष 2015 में गांव निवासी टीकम और उसकी पत्नी कमला देवी को रहने के लिए दी थी। जिसमें आरोपी टीकम और उसकी पत्नी कमला झोपड़ी बनाकर रहते थे। फरवरी 2016 में सुमेर ने जमीन खाली करने के लिए कहा, तो दोनों नाराज हो गए। घटना वाले दिन सुमेर गांव के ही भट्ठे पर काम करके घर लौटे थे। इस दौरान परिवार का कोई सदस्य घर पर नहीं था। तभी टीकम और कमला ने सुमेर के हाथ-पैर बांध दिए और घर में रखे पुआल के ढेर में रखकर ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। घटना की जानकारी होने पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। सुमेर के भाई रामरत भी मौके पर आ गए। परिजनों ने किसी तरह आग बुझाई और सुमेर को अस्पताल में भर्ती कराया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
मृत के भाई ने दर्ज कराया था मुकदमा
मृतक के भाई रामरतन की तहरीर पर टीकम व कमला के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। जिसके बाद पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। तभी से आरोपी टीकम जेल में बंद है, जबकि कमला देवी को जमानत मिल गई थी। ये मुकदमा अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय निशांत शैव्य की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी पैरवी कर रहे थे। सोमवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। साक्ष्य और सबूतों के आधार पर आरोपी टीकम और उसकी पत्नी कमला देवी को दोषी करार दिया। साथ ही दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई।