घर से बुलाकर निजी बस परिचालक की गोली मारकर हत्या करने के दोषी को जिला जज की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 12500 रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में एक आरोपी को बरी कर दिया। दोषी जमानत पर जेल से बाहर था, न्यायालय का फैसला आने के बाद उसे कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।
हसनपुर के मोहल्ला कोट गढ़ी में मेहताब का परिवार रहता है। उनका बेटा दिलशाद निजी बस पर परिचालक था। मोहल्ले का ही रहने वाला सलमान और मोहल्ला कायस्थान के रहने वाला युसूफ दिलशाद के दोस्त थे। 23 जून 2011 को सुबह करीब 7 बजे सलमान मेहताब के घर आया और उनके बेटे दिलशाद को मोटरसाइकिल पर बैठा कर ले गया। इस दौरान सलमान ने सिहाली जागीर गांव जाने की बात कही थी लेकिन रात को दिलशाद घर नहीं लौटा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू कर दी। काफी तलाश करने के बाद भी उसका कहीं पता नहीं लगा। अगले दिन सुबह करीब 7:30 दिलशाद का शव अतरासी गांव के पास हसनपुर रोड पर पड़ा मिला। दिलशाद की गोली मारकर हत्या की गई थी। इस मामले में पिता मेहताब ने सलमान और यूसुफ के खिलाफ रजबपुर थाने में अपहरण कर षड्यंत्र के तहत हत्या करने के आरोप में केस दर्ज कराया था। बाद में पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया था। फिलहाल दोनों जमानत पर जेल से बाहर थे। ये मुकदमा जनपद न्यायाधीश संजीव कुमार की अदालत में विचाराधीन था। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता महावीर सिंह पैरवी कर रहे थे। रजबपुर पुलिस ने आरोपियों को सजा दिलाने में जोरदार पैरवी की। बुधवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की और साक्ष्य व सबूतों के आधार पर सलमान को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 12 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगाया है।