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तेंदुए ने नीलगाय के दो बच्चों को निवाला बनाया

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तेंदुए ने नीलगाय के दो बच्चों को निवाला बनाया
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मंडी धनौरा (अमरोहा)। क्षेत्र के गांव ईश्वरदेवा के निकट तेंदुए ने नील गाय के दो बच्चों को अपना निवाला बना लिया। एक के अवशेष व दूसरा अधमरा पाया गया। जानकारी होने पर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन विभाग की टीम ने नीलगाय के दोनों बच्चों को गड्ढे कर दबा दिया है।
रविवार की सुबह ग्राम फिरोजपुर बगद निवासी जबर सिंह ईश्वर देवा गांव में स्थित अपने खेत पर गया। वहां उसे नील गाय के दो बच्चे लहूलुहान हालत में पड़े मिले। जबर सिंह की सूचना पर कुछ ही देर में वहां ग्रामीण एकत्र हो गए। वन विभाग की टीम भी सूचना मिलने पर मौके पर पहुंच गई। वन दरोगा राकेश कुमार ने बताया नीलगाय के एक बच्चे का पेट का हिस्सा तेंदुए ने खा लिया था। जबकि दूसरे बच्चे के गले पर पंजे के निशान थे। वह बुरी तरह घायल था। तत्काल ही पशु चिकित्सक को मिलाकर उसका उपचार कराया गया लेकिन उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का दावा था कि उन्होंने तेंदुए को नीलगाय के बच्चों पर हमला करते हुए देखा है। वन विभाग का कहना है घटनास्थल सेंचुरी क्षेत्र में आता है और वहां जंगली पशुओं का अभ्यारण है। तेंदुए के द्वारा नील गाय के बच्चों को अपना निवाला बनाए जाने के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन दरोगा राकेश कुमार ने ग्रामीणों से अपने खेतों पर अकेले नहीं जाने की अपील की है।
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तेंदुए को पिंजरे में कैद करने के लिए नहीं मिली बकरी
गजरौला में तेंदुए को पिंजरे में कैद करने के लिए वन विभाग को बकरी नहीं मिली। जंगल में पिंजड़ा तो लगा दिया लेकिन बकरी नहीं बांधी गई। बड़ा सवाल है कि पिंजड़ा में बकरी नहीं बांधी गई तो तेंदुआ उसमें कैद कैसे होगा। उधर तेंदुए की रोजाना की दस्तक के कारण ग्रामीणों में खासी दहशत है।
क्षेत्र के गांव होशंगपुर गुर्जर में बीते कई दिन से तेंदुआ ग्रामीणों की दहशत का पर्याय बना है। वह रोजाना खेतों में दिखाई दे रहा है। दहशत के कारण ग्रामीण अकेले खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। एकत्र होकर खेतों में काम करने को मजबूर हैं। वन विभाग की हीला हवाली के चलते ग्रामीणों ने डीएम को फोन कर तेंदुए को पकड़वाने की मांग की थी। डीएम की डांट फटकार के बाद वन विभाग की टीम ने शनिवार को जंगल में पिंजड़ा लगवा दिया, मगर गौर करने वाली बात यह है कि वन विभाग की टीम को पिंजड़े में बांधने के लिए बकरी नहीं मिली।
बड़ा सवाल है कि जब बकरी नहीं बांधी गई तो तेंदुआ किस तरह कैद होगा। वन दरोगा राकेश कुमार का कहना है कि तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजड़ा तो शनिवार को लगा दिया गया था लेकिन उसमें बांधने के लिए बकरी नहीं मिल पाई थी। बकरी तलाश की जा रही है। शाम तक मिल गई तो बांध दी जाएगी।
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हर ग्रामीण अपने खेत में लगवाना चाहता था पिंजड़ा
तेंदुए की दहशत के साए में जी रहे होशंगपुर गुर्जर के ग्रामीणों को तेंदुए से निजात दिलाने के लिए शनिवार को वन विभाग की टीम पिंजड़ा लेकर पहुंच गई। वन दरोगा ने बताया कि जैसे ही वह पिंजड़ा लगाने की तैयारी कर रहे थे, ग्रामीण आपस में लड़ने को तैयार हो गए। हरेक ग्रामीण अपने खेत में पिंजड़ा लगवाना चाहता था। किसी तरह उनको समझा कर शांत किया गया।
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